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लाख दवाई के एक दवाई बथुआ -----

लाख दवाई के एक दवाई बथुआ -----
( अपच,बबासीर, कुष्ठ रोग, केश आदि लेल उपयोगी बथुआ)

संकलन आ अनुवाद : ✍👤नीरज मिश्र "मुन्नू"

"बथुआ" अहि नाम सँ संभवतः सब परिचित होयब मुदा एकर गुण सँ आई हम परिचय करबैत छी।
  प्रतिदिन बथुआ साग खएला सँ गुर्दा (किडनी) में पथरी नै होइत छै । बथुआ आमाशय के बलवान बनबैत अछि आ गर्मी सँ बढल यकृत ( लिवर) के ठीक करैत अछि। एकर प्रकृति तर आ शीतल होईत छैक, ई अधिकतर गहुमक  खेत में गहूमक संग साथ उगैत अछि। 

रासायनिक सँघटन :-

बथुआ में लोहा, पारा, सोना आ क्षार पाओल जाईत छैक।

बथुआ के साग जतेक अधिक सँ अधिक  सेवन कएल जाए, निरोग रहबाक लेल ओतेक उपयोगी होइत अछि। बथुआ के सेवन कम सँ कम मसल्ला के संग करी।

बथुआ के औषधीय प्रकृति:-

कब्ज: बथुआ आमाशय के बल दैत अछि आ कब्ज के दूर करैत अछि, बथुआ के साग दस्तावर होईत छैक, कब्ज वाला व्यक्ति के बथुआक साग नित्य खएबाक चाही। किछु सप्ताह नित्य बथुआक साग खएला सँ सदा रहय  वाला कब्ज दूर होइत अछि। शरीर में ताकत अबैत छैक आ स्फूर्ति बनल रहैत छै।

पेटक रोग :  जाधरि  बथुआ के साग भेटैत रहए, नित्य एकर सेवन करी। बथुआ के झोर, उसिनल पैन पीला सँ पेटक सब प्रकारक रोग यकृत, तिल्ली, अजीर्ण, गैस, कृमि, दर्द, अर्श पथरी ठीक भ' जाईत छैक।

* पथरी हुए त' एक गिलास कांच बथुआ के रस में चीनी फेंट नित्य पियला सँ पथरी टूईट के बाहर निकल अबैत अछि। ढील, लीख हुए त' बथुआ के उसीन एकर पैन सँ माथ धोला सँ ढील आ लिख मैर जाइत छैक आ केश साफ होईत अछि।

* यदि कोनो महिला के मासिक धर्म रुकल होइन दू चम्मच बथुआ के बीया एक गिलास पैन में उसीन लेथि आ आधा रहला पर छाईन के पी लेला सँ मासिक धर्म के समस्या सँ पूर्ण निजात भेटैत छैक। आँखि में सूजन, लाली हुए त' प्रतिदिन बथुआक साग खाई।

मूत्र रोग : आधा किलो बथुआ आ जल तीन गिलास, दुनु के संग में खौला ली आ फेर जल छाईन ली। बथुआ के निचोईड़ जल निकाईल ओकरो  छनलाहा जल में मिला ली। स्वाद के लेल नेबो, जीर, कनिये मरीच आ बिटनोन फेंट ली और पी जाई।
अहि प्रकार सँ तैयार कएल जल दिन में तीन बेर पीड़ित के पियाबी। एहिसँ लघुशंका में जलन, लघुशंका कए पश्चात होमए वाला दर्द आ टीस उठब ठीक भ' जाईत अछि, दस्त साफ अबैत छैक आ पेटक गैस, अपच दूर होईत छैक। 

* मूत्राशय, गुर्दा आ मूत्रक रोग में बथुआक साग लाभदायक होइत छैक। लघुशंका रुकि-रुकि के अबैत हुए त' एकर रस पीयला सँ मूत्र साफ़ सँ अबैत अछि।
* सफेद दाग, दाद,नोचनी,फोंका, कुष्ट आदि चर्म रोग में नित्य बथुआ उबाईल, निचोईड़ क' रस पिबी तथा साग खयबाक चाही। बथुआ के उबालल पैन सँ चर्म के धोअल करी। बथुआ के कांच पात के पीस आ ओकरा निचोईड़  के रस निकाईल ली। दू कप रस में आधा कप तिलक तेल फेंट मंद-मंद आगि पर गर्म करी। जखन रस जरलाक पश्चात मात्र जल बाँचल रहि जाय त' छाईन क' शीशी में भैर ली तथा चर्म रोग पर नित्य लगाबी। अधिक समय तक लगौला सँ अवश्य लाभ प्राप्त होयत।

* केशक लेल सेहतमंद

केशक प्राकृतिक रंग बना के राखय में बथुआ धातृ सँ कम गुणकारी नै होइत अछि। बथुआ में विटामिन आ खनिज तत्वक  मात्रा धातृ सँ अधिक होईत छै। एकरा में आयरन, फास्फोरस आ विटामिन ए व डी प्रचुर मात्रा में पाओल जाइत अछि।

* दांतक समस्या में असरदार

बथुआ के पात के कांचे चिबौला सँ मुंहक अल्सर, साँसक दुर्गध, पायरिया आ दांतं सँ जुड़ल अन्य समस्या में बड्ड फायदा होईत छैक।

*बवासीर के समस्या सँ निजात

भोर साँझ बथुआ खायला सँ बवासीर में बड्ड लाभ भेटैत छैक। 

संकलन आ अनुवाद : ✍👤नीरज मिश्र "मुन्नू"



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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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