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निर्मोहि मनके परताईर रहल छी

 निर्मोहि मनके परताईर रहल छी

✍👤राम सोगारथ यादव

अहिके देल ओ दर्द कागज प उताईर रहल छी
कौहुना कौहुना अपन जीनगी ससाईर रहल छी

की गीत लिखु आ की गजल लिखु हमतँ बस 
अहिके यादमे लटकल मनके नकाईर रहल छी

अहाँ जे छोडिक गेलियै ओ प्रेमक टुटल मचान
ओहि पऽ हम अपन प्रेमक लति पसाईर रहल छी

फँसबो कैलहितँ केहन निर्मोहिकें जालमे रे मन
आई छुटलो घाबक खोंटी हम ओदाईर रहल छी

नइ ठकनी कहब अहाँकें नइ दिल तोरनी कहब
हमतँ बस ओ निर्मोहि मनके परताईर रहल छी

✍👤राम सोगारथ यादव
धनुषा, नेपाल


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पोस्ट -:- अशोक कुमार सहनी
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