"नरक निवारण चतुर्दशी"
"नरक निवारण चतुर्दशी"
✍👤विनय झा
"ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्!!"
माघ मास कृष्ण पक्षक चतुर्दशी- देवाधिदेव महादेवक प्रिय दिन,आइ देवता लोकनि परमपिता ब्रह्माजी सँ आदेश लय शिव केर विवाह हेतु राजा हिमालय'क पुत्री गौरी संग कथा-वार्ता सुनिश्चित कयल गेल छल।
आजुक दिन अत्यंत शुभ मानल गेल अछि आ महत्व सेहो बड्ड पैघ छैक। मानव प्रजाति गार्हस्थ जीवन मे रहैत जे किछु पापाचार अनचोके कयने रहैछ ताहि लेल क्षमायाचना आजुक दिन व्रत राखि करैत अछि। कर्म रूपे फल भेटबाक बात मानब संसार मे प्रसिद्ध छैक।तुलसी दासजी लिखैत छथि--
"कर्म प्रधान विश्व रचि राखा-जो जस करहिं सो तस फल चाखा।"
अर्थात एहि संसार मे जे कियो आयल अछि ओ निहित कर्म करबे करत ताहि अनुरूप क्रियमाण,संचित ओ प्रारब्ध तीन तरहक फल पबैछ। हिन्दु धर्म-संस्कृति मे जीवन पर्यन्त कर्मफल' क जे किछु भोग छैक तेकर अतिरिक्त मृत्युपरांत सेहो कर्म अनुसार गति मानल गेल छैक। स्वर्ग आ नरक केर परिकल्पना ताहि लेल मानल जाइत छैक। सोझ शब्द मे- 'पुण्य' सँ स्वर्ग आ 'पाप' सँ नर्क भोगक मान्यता छैक।
गार्हस्थ जीवन मे विभिन्न प्रकारक कर्म करैत अनचोके कतेको पापाचार होइत रहैत छैक। लेकिन दर्शनशास्त्र ओ वैदिक कर्मकाण्ड द्वारा एहन तरहक पापक भोग केँ मेटाबय लेल किछु व्रत आ अनुष्ठान आदिक चर्चा आयल अछि।माघ कृष्ण चतुर्दशीक व्रत एहने पाप सँ मुक्तिकारक होयबाक चलते 'नरक निवारण चतुर्दशी' कहाइछ। आइ लोक दिन भरि उपास रखैत अछि। आजुक दिन शिव परिवारक पूजन मे वेल आ तीर्थक जल सँ जलाभिषेक'क विशेष महत्व अछि।
मिथिला क्षेत्र मे मकर संक्रांति सँ शुरु भेल शिवमठ पर दर्शन- पूजा रवि-रवि मकर मेला जयबाक प्रक्रिया मे आइ चतुर्दशी दिन सेहो दर्शन-पूजापाठ लेल शिवमठ पर जयबाक परंपरा छैक। लोक आजुक दिन व्रतक पारण लेल मठे पर सँ वैर' क फर आनि संध्याकाल पारण क' व्रतक समापन करैत अछि।
प्राचीन काल सँ मिथिला मे आजुक दिन घरक गृहिणी( नारीवर्ग) विशेष रूप सँ मठ पर जाइत छथि आ नैहरा सहित अन्य सगा- संबंधी सभ सँ सेहो भेंट-घांट होइत छन्हि। कतेको रास वैवाहिक संबंध आजुक दिन मठ पर कनियाँ निरीक्षण सँ पूर्ण होइत छैक। अस्तु।
"नरक निवारण चतुर्दशी"
ऊँ नम: शिवाय! हर-हर महादेव!
जय मिथिला!
✍👤विनय झा
२६-०१-२०१७।
💗💗💗💗💗💟💓💓👃👃🎼💗
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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✍👤विनय झा
"ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्!!"
माघ मास कृष्ण पक्षक चतुर्दशी- देवाधिदेव महादेवक प्रिय दिन,आइ देवता लोकनि परमपिता ब्रह्माजी सँ आदेश लय शिव केर विवाह हेतु राजा हिमालय'क पुत्री गौरी संग कथा-वार्ता सुनिश्चित कयल गेल छल।
आजुक दिन अत्यंत शुभ मानल गेल अछि आ महत्व सेहो बड्ड पैघ छैक। मानव प्रजाति गार्हस्थ जीवन मे रहैत जे किछु पापाचार अनचोके कयने रहैछ ताहि लेल क्षमायाचना आजुक दिन व्रत राखि करैत अछि। कर्म रूपे फल भेटबाक बात मानब संसार मे प्रसिद्ध छैक।तुलसी दासजी लिखैत छथि--
"कर्म प्रधान विश्व रचि राखा-जो जस करहिं सो तस फल चाखा।"
अर्थात एहि संसार मे जे कियो आयल अछि ओ निहित कर्म करबे करत ताहि अनुरूप क्रियमाण,संचित ओ प्रारब्ध तीन तरहक फल पबैछ। हिन्दु धर्म-संस्कृति मे जीवन पर्यन्त कर्मफल' क जे किछु भोग छैक तेकर अतिरिक्त मृत्युपरांत सेहो कर्म अनुसार गति मानल गेल छैक। स्वर्ग आ नरक केर परिकल्पना ताहि लेल मानल जाइत छैक। सोझ शब्द मे- 'पुण्य' सँ स्वर्ग आ 'पाप' सँ नर्क भोगक मान्यता छैक।
गार्हस्थ जीवन मे विभिन्न प्रकारक कर्म करैत अनचोके कतेको पापाचार होइत रहैत छैक। लेकिन दर्शनशास्त्र ओ वैदिक कर्मकाण्ड द्वारा एहन तरहक पापक भोग केँ मेटाबय लेल किछु व्रत आ अनुष्ठान आदिक चर्चा आयल अछि।माघ कृष्ण चतुर्दशीक व्रत एहने पाप सँ मुक्तिकारक होयबाक चलते 'नरक निवारण चतुर्दशी' कहाइछ। आइ लोक दिन भरि उपास रखैत अछि। आजुक दिन शिव परिवारक पूजन मे वेल आ तीर्थक जल सँ जलाभिषेक'क विशेष महत्व अछि।
मिथिला क्षेत्र मे मकर संक्रांति सँ शुरु भेल शिवमठ पर दर्शन- पूजा रवि-रवि मकर मेला जयबाक प्रक्रिया मे आइ चतुर्दशी दिन सेहो दर्शन-पूजापाठ लेल शिवमठ पर जयबाक परंपरा छैक। लोक आजुक दिन व्रतक पारण लेल मठे पर सँ वैर' क फर आनि संध्याकाल पारण क' व्रतक समापन करैत अछि।
प्राचीन काल सँ मिथिला मे आजुक दिन घरक गृहिणी( नारीवर्ग) विशेष रूप सँ मठ पर जाइत छथि आ नैहरा सहित अन्य सगा- संबंधी सभ सँ सेहो भेंट-घांट होइत छन्हि। कतेको रास वैवाहिक संबंध आजुक दिन मठ पर कनियाँ निरीक्षण सँ पूर्ण होइत छैक। अस्तु।
"नरक निवारण चतुर्दशी"
ऊँ नम: शिवाय! हर-हर महादेव!
जय मिथिला!
✍👤विनय झा
२६-०१-२०१७।
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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