हे माय शारदे
इ वन्दना मॉ शारदे कऽ समर्पित अछि । बसंत पंचमीक
शुभ पूजनोत्सव कऽ लेल ।
--- हे माय शारदे -----
✍👤मणिकान्त झा
हे हंस वाहिनी,हे ज्ञानदायनि,
सुनियौ हमर गुहार यै,माय ।
सुनियौ हमर गुहार यै,माय----
आब अबियौ हमरे द्वार ,करियौ हमर उद्धार ,यै माय।
अहॉ बिन हमर जीवनक ,
नैअ छैक कोनो आधार यै माय,
फऽसलऽ छी हम मँझधार मऽ माय,
हम छी अहिंक शरण मऽ आयल ,
लगबियौ हमरो पार यै,माय।
हम अहि कऽ शरण मऽ----
उज्जर कमल अछि, ओहि पर अहाँ छी विराजल,
हाथ मऽ पोथी आ' ,
माथ पर मकुट अछि सुन्दर साजल,
बाजि रहल अछि संगीतक तान,यै माय ।
मुख पर अछि मधुर मुस्कान यै माय,
बाटि रहल छी अहॉ दिव्य ज्ञान यै, माय।
अहॉ छि वीणा, वाणी अहीं छी,
अहॉ छि स्वरा , रागिनी अहीं छी,
अहॉ छि विद्या , वादनि अहीं छी।
वेदक भाषा,पुराणक वाणी ,
गीताक सार मुनियों नैअ जानि ,
दासक जिह्वा पर बैसि,
बनेलियैन कालिदासो कऽ बड़का ज्ञानी,यै माय ।
कऽऽल जोड़ि हम निहोरा करैत छी,
सात सुरक साज-श्रृंगार कऽ संगे
बसियौ हमरे द्वार यै माय ,
हरू हमर क्लेश विचार यै माय ।
शीश नबाय हम मांगि रहल छी,
अहॉ सऽ हम अप्पन अधिकार यै,
देखि रहल छी स्वप्न जे हम,
करू ओकरा साकार यै माय,
अहॉ बिन हमरा आश ककर अछि ,
अहॉ नैअ सुनबैय तऽ, के हमर सुनतैय,
अप्पन मोनक व्यथा , माय ककरा हम कहबैय,
आब नैअ करू हमरा निराश यै माय ।
पुत्र अभगला भटैक रहल अछि,
चलैत अज्ञानक बाट पर,
थाकि गेलहूँ आब हम ,
थामि लियऽ हमर हाथ यै माय ।
अहि पर हमरा अछि आश यै माय ।
अहि पर हमरा अछि----
दिऔ मणि पर कनिक ध्यान यै माय ।
आब करियौ हमर निदान,यै माय ,
बुरबको छी तऽ ,छी अहिक संतान,
अप्पन चरण मऽ दिऔ हमरा स्थान यै माय ।
दिऔ चरण---
✍👤मणिकान्त झा
💓💓💓💝💝💓💝❤💝💚💚
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
💝💝❤💓💓💝💚💚💚💚💓
💙💙💙💙
शुभ पूजनोत्सव कऽ लेल ।
--- हे माय शारदे -----
✍👤मणिकान्त झा
हे हंस वाहिनी,हे ज्ञानदायनि,
सुनियौ हमर गुहार यै,माय ।
सुनियौ हमर गुहार यै,माय----
आब अबियौ हमरे द्वार ,करियौ हमर उद्धार ,यै माय।
अहॉ बिन हमर जीवनक ,
नैअ छैक कोनो आधार यै माय,
फऽसलऽ छी हम मँझधार मऽ माय,
हम छी अहिंक शरण मऽ आयल ,
लगबियौ हमरो पार यै,माय।
हम अहि कऽ शरण मऽ----
उज्जर कमल अछि, ओहि पर अहाँ छी विराजल,
हाथ मऽ पोथी आ' ,
माथ पर मकुट अछि सुन्दर साजल,
बाजि रहल अछि संगीतक तान,यै माय ।
मुख पर अछि मधुर मुस्कान यै माय,
बाटि रहल छी अहॉ दिव्य ज्ञान यै, माय।
अहॉ छि वीणा, वाणी अहीं छी,
अहॉ छि स्वरा , रागिनी अहीं छी,
अहॉ छि विद्या , वादनि अहीं छी।
वेदक भाषा,पुराणक वाणी ,
गीताक सार मुनियों नैअ जानि ,
दासक जिह्वा पर बैसि,
बनेलियैन कालिदासो कऽ बड़का ज्ञानी,यै माय ।
कऽऽल जोड़ि हम निहोरा करैत छी,
सात सुरक साज-श्रृंगार कऽ संगे
बसियौ हमरे द्वार यै माय ,
हरू हमर क्लेश विचार यै माय ।
शीश नबाय हम मांगि रहल छी,
अहॉ सऽ हम अप्पन अधिकार यै,
देखि रहल छी स्वप्न जे हम,
करू ओकरा साकार यै माय,
अहॉ बिन हमरा आश ककर अछि ,
अहॉ नैअ सुनबैय तऽ, के हमर सुनतैय,
अप्पन मोनक व्यथा , माय ककरा हम कहबैय,
आब नैअ करू हमरा निराश यै माय ।
पुत्र अभगला भटैक रहल अछि,
चलैत अज्ञानक बाट पर,
थाकि गेलहूँ आब हम ,
थामि लियऽ हमर हाथ यै माय ।
अहि पर हमरा अछि आश यै माय ।
अहि पर हमरा अछि----
दिऔ मणि पर कनिक ध्यान यै माय ।
आब करियौ हमर निदान,यै माय ,
बुरबको छी तऽ ,छी अहिक संतान,
अप्पन चरण मऽ दिऔ हमरा स्थान यै माय ।
दिऔ चरण---
✍👤मणिकान्त झा
💓💓💓💝💝💓💝❤💝💚💚
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
💝💝❤💓💓💝💚💚💚💚💓
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