💘 पहिने हाय तखन बाय
💘 पहिने हाय तखन बाय
✍🏻 वी०सी०झा"बमबम"
थिक इ कलजुगिअा छौंड़ी
मुंह अबए सभके अरउ तोरी
देखवा मे तऽ दुब्बरहि पातर
संस्कार करए छै एकरा बांतर
पाउड एस्नो कएने खुब भारी
लगए जेनाह हो विलैंतिया नारी
हाट बजार इ करए खुब लफरा
मुह पर बान्हि कऽ कारी कपरा
घर संऽ निकलए नित दिन भोरे
हाथ मेऽ लय किताब कोपी थोरे
छौड़ा सभक मोन बड्ड ललचाबए
राति अन्हरिआ धरि घर इ आबए
बाट बटोही सभ एकरहि निहारए
पाछु परि के लफंगा पीक्की मारए
मोने मोन बुछए छल हम छी मीरा
बाट जोहए ओकर गाम केर हीरा
तकरा देखि कैंऽ दैत छल हँसि
बुझलक छौड़ा जे गेल इ फँसि
हीरो आब घर संऽ निकलऽ लागल
प्रेम मे ओकर भऽ गेल छल पागल
छौड़ी बुझलक तीर सटीक लागल
फँसि गेल जाल मे आय इ अभागल
अनचोके टकरायल दुनू बीच बाट
लगिच छल ओतए पोखरीक घाट
बूनैत ओतहि तेंऽ गूरुकुनमा टाट
देखलक सभ दृश्य बैसि ओ खाट
कहलक तत्क्षन सुनए गैऽ छौंड़ी
बाज तोरा लेल हम की की करी
पलटि कहलहि मानबें एकटा गप
करमे तोंऽ हमर कह प्रेमक जप
छौड़ा बाजि परल किआ ने जान
तोरा लेल आनि देबहु अकासक चान
पहिने तऽ तों चल संग हमर बजार
गमल छौड़ा गेल आब गोटेक हजार
आ ने एमहर रह ने ओतए ठार
आय लगए छउ मोन तोहर भकरार
ढ़ूकल दुनू संग बड्ड पैघ दोकान
छलहि जाहि मे सभ महगे समान
छौड़ीक फंसिन भेलए एकटा हार
दाम फुछलक तऽ छल बीस हजार
छौड़ा तऽ छल पहिने संऽ कृपन्न
सुनिते दाम एतेक भए गेल सन्न
मुंह सँऽ निकलहि माय गऽइ माय
भांड़ मऽ एहन महग इ प्रेम जाय
बाजि परलैक ओ आब तूं चल घर
ताकि ले तों अपना लेल दोसर वर
छौड़ी केऽ चढ़लै अजबहिं खिस
निकल उचक्का कनें तों बाहर दीस
किन सकय नहि जे एक छोट समान
कल्पना करत मोन अकासक चान
छौड़ों कहलकैक सुन गऽइ दाय
आजीवन लए करैत छिऔ टाटा बाय
✍🏻 वी०सी०झा"बमबम"
कैथिनियाँ
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
❤❤❤
✍🏻 वी०सी०झा"बमबम"
थिक इ कलजुगिअा छौंड़ी
मुंह अबए सभके अरउ तोरी
देखवा मे तऽ दुब्बरहि पातर
संस्कार करए छै एकरा बांतर
पाउड एस्नो कएने खुब भारी
लगए जेनाह हो विलैंतिया नारी
हाट बजार इ करए खुब लफरा
मुह पर बान्हि कऽ कारी कपरा
घर संऽ निकलए नित दिन भोरे
हाथ मेऽ लय किताब कोपी थोरे
छौड़ा सभक मोन बड्ड ललचाबए
राति अन्हरिआ धरि घर इ आबए
बाट बटोही सभ एकरहि निहारए
पाछु परि के लफंगा पीक्की मारए
मोने मोन बुछए छल हम छी मीरा
बाट जोहए ओकर गाम केर हीरा
तकरा देखि कैंऽ दैत छल हँसि
बुझलक छौड़ा जे गेल इ फँसि
हीरो आब घर संऽ निकलऽ लागल
प्रेम मे ओकर भऽ गेल छल पागल
छौड़ी बुझलक तीर सटीक लागल
फँसि गेल जाल मे आय इ अभागल
अनचोके टकरायल दुनू बीच बाट
लगिच छल ओतए पोखरीक घाट
बूनैत ओतहि तेंऽ गूरुकुनमा टाट
देखलक सभ दृश्य बैसि ओ खाट
कहलक तत्क्षन सुनए गैऽ छौंड़ी
बाज तोरा लेल हम की की करी
पलटि कहलहि मानबें एकटा गप
करमे तोंऽ हमर कह प्रेमक जप
छौड़ा बाजि परल किआ ने जान
तोरा लेल आनि देबहु अकासक चान
पहिने तऽ तों चल संग हमर बजार
गमल छौड़ा गेल आब गोटेक हजार
आ ने एमहर रह ने ओतए ठार
आय लगए छउ मोन तोहर भकरार
ढ़ूकल दुनू संग बड्ड पैघ दोकान
छलहि जाहि मे सभ महगे समान
छौड़ीक फंसिन भेलए एकटा हार
दाम फुछलक तऽ छल बीस हजार
छौड़ा तऽ छल पहिने संऽ कृपन्न
सुनिते दाम एतेक भए गेल सन्न
मुंह सँऽ निकलहि माय गऽइ माय
भांड़ मऽ एहन महग इ प्रेम जाय
बाजि परलैक ओ आब तूं चल घर
ताकि ले तों अपना लेल दोसर वर
छौड़ी केऽ चढ़लै अजबहिं खिस
निकल उचक्का कनें तों बाहर दीस
किन सकय नहि जे एक छोट समान
कल्पना करत मोन अकासक चान
छौड़ों कहलकैक सुन गऽइ दाय
आजीवन लए करैत छिऔ टाटा बाय
✍🏻 वी०सी०झा"बमबम"
कैथिनियाँ
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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