धुर छोरू नें...
धुर छोरू नें...
✍👤रोशन मिश्रा
कियो नही पतीयात ll
ज साँच कहबै त बागर छी
झूठ बाजब त आहा सागर छी
बस सदिखन अपने दुख बतियात ll
धुर छोरू नें ................
मोनक व्यथा आहा कीनका कहबै ??
अपने हृदय में छुरा कोना भौकबै ??
पीठ पाछू स सब बोकीयात ll
धुर छोरू नें ................
सब कियो एकैह रंग स राँगल छैथ
सब हृदय स फुटल भाँगल छैथ
सब मील अहिक हृदय में सँहियात ll
धुर छोरू नें ..................
मैथिल-मिथिला केर नाम-नाम क
बस अपने टा काम-काम क
अपन नामक झंडा लहरायत ll
धुर छोरू नें ...................
नी:स्वार्थ बस काज करैत रहूँ
माँ मैथिली के लाज धरैत रहूँ
हे !! अहीना सब चीचीयात ll
धुर छोरू नें .....................
---------रोशन मिश्रा
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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