पाथरे के भोला अहाँ पाथरे करेज यौ
पाथरे के भोला अहाँ पाथरे करेज यौ
रचना :- सरस जी
पाथरे के भोला अहाँ पाथरे करेज यौ
अहाँ के भोला एक रती नै दरेघ यौ
दुखिया बना के दानी हमरा रखलियै सुख के मुह शिव देखअ ने दलियौ ।
केहन वेदर्दी अहाँ मोन में येअ भेद यौ
अहाँ के भोला एक रती नै दरेघ यौ
पाथरे के भोला अहाँ पाथरे करेज यौ --------
ककरा उपर करबै हम गुमान यौ अहाँ सनक जग में के दयावान यौ।
हमरा दशा के देख फेरेनै करेज यौ
अहाँ के भोला एक रती नै दरेघ यौ
पाथरे के भोला अहाँ पाथरे करेज यौ - - - - - -
जिबन भेर बाबा अहाँ के सेबलियो तैयो मनोरथ बाबा हमर नै पुरेलियौ ।
सरस अहाँ के भेल गरा के घेघ यौ
अहाँ के भोला एक रती नै दरेघ यौ
पाथरे के भोला अहाँ पाथरे करेज यौ - - - - - -
रचना -सरसजी
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पोस्ट :-अशोक कुमार सहनी
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रचना :- सरस जी
पाथरे के भोला अहाँ पाथरे करेज यौ
अहाँ के भोला एक रती नै दरेघ यौ
दुखिया बना के दानी हमरा रखलियै सुख के मुह शिव देखअ ने दलियौ ।
केहन वेदर्दी अहाँ मोन में येअ भेद यौ
अहाँ के भोला एक रती नै दरेघ यौ
पाथरे के भोला अहाँ पाथरे करेज यौ --------
ककरा उपर करबै हम गुमान यौ अहाँ सनक जग में के दयावान यौ।
हमरा दशा के देख फेरेनै करेज यौ
अहाँ के भोला एक रती नै दरेघ यौ
पाथरे के भोला अहाँ पाथरे करेज यौ - - - - - -
जिबन भेर बाबा अहाँ के सेबलियो तैयो मनोरथ बाबा हमर नै पुरेलियौ ।
सरस अहाँ के भेल गरा के घेघ यौ
अहाँ के भोला एक रती नै दरेघ यौ
पाथरे के भोला अहाँ पाथरे करेज यौ - - - - - -
रचना -सरसजी
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पोस्ट :-अशोक कुमार सहनी
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