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चलु बुची कने अपन चुनरी सभारी

।।। मैथिली चहटगर गीत।।


            ✍👤आनंद मिश्र 'मिलन'

चलु बुची कने अपन चुनरी सभारी के,
सब नेय छै हमरे जेका सोचू विचारी के।                         
चलु बुची कने अपन.....।

जुआनी चढल छौरा सब बउरायल छैय,
ककरो नेय आब कोनो भरोसा रहल छैय।
मुँह किया दुसेय छी ये चशमा पहिरी के।
चलु बुची कने अपन......।

लाले लाले गाल ठोर गुलाबी रसदार छौअ,
चाँद सन सुंदर तोहर मुँह के आकार छौअ।
नजेर अही पर छैय ये पुरा सकरी के।
चलु बुची कने अपन........।

हाइ हिल के सेणडिल चलेय छै पहिर गे,
राजधानी ट्रेन सन लचके छौअ कमर गे।
रोड़ नेय छै सुंदर सिंहवाडा उतरी के।
चलु बुची कने अपन.......।।

.✍👤आनंद मिश्र "मिलन"


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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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