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चुप चुप रै बौआ

चुप चुप रै बौआ



✍👤सरोज मण्डल

कुहु कुहु कोइली करै,का का करै कोआ ।
चुप चुप रै बौआ, चुप चुप रै बौआ।।

चान संन मुह तोहर ,घुमरल घुमरल केश रौ।
बाबु तोहर बढ कमाउवा धेने छौ परदेश रौ।।
माइ तोहर घरमे भेलौ असगरुवा।
चुप चुप रै,,,,,,,,,,,,,,,

तोहर मुह देखेले बौआ आश लगोने नानी रौ।
तोरे खातिर बना के धर्ने दश भेर के चांनी रौ।।
नाना तोहर बढ कन्जुस नुकाके रखने छौ।ढ़ोआ ।
चुप चुप रै,,,,,,,,,,,,,,,

बुढया दादी खुर खुर करौ हर्दम बारी झारी ।
नबकी काकी दिनमे बदलो दश गो नबका सारी।।
 का का तोहर कारी केश मे लगबौ तेल गमकोआ ।
चुप चुप रै,,,,,,,,,,,,,,

कुहु कुहु कोइली करै,का का करै कोआ ।
चुप चुप रै बौआ चुप चुप रै बौआ ,
चुप चुप रै बौआ

लेखक ✍👤सरोज मण्डल 
इनरुवा ,सुन्सरी,नेपाल
इनरुवा के प्पुलर fm के Rj ,मधुर मिथिलानामक कार्यक्रम के संचलक 


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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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