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पूर्णिमाके चान बैन उगल रहु

पूर्णिमाके  चान बैन उगल रहु



✍👤कलमदेब महतो

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अहाँ प्रिय पुणिॅमाके चान बैन रहु उगल
हम प्रिय अहाँके देखैत रहब बैन बादल।

हम पियास बैन प्रिय पिबैत रहब।
अहाँ सागरके पानी प्रिय रहु बनल।।

हम माली बैन बागमे सुगन्ध लैत रहब।
अहाँ फुल बैन प्रिय बागमे  रहु फुलल।।

हम अहाँके प्रेमक घन्टी बैन हिलैत रहब।
हमरा मनके मन्दिरमे प्रिय अहाँ रहु बैंसल।।

हम कलमदेब पेन बैन लिखैत रहब।
अहाँ प्रिय कापी किताब बैन रहु सजल।।

✍👤कलमदेब महतो
जनकपुर धाम

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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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