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गौड़ी जुनि करु एहन बिआह

गौड़ी जुनि करु एहन बिआह 


✍👤अमित पाठक 
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गौड़ी जुनि करु एहन बिआह-२
भाँग पीबि नंगटे ब'र नाचए
अनमन भेल बताह
गौड़ी जुनि करु.............

बरियाती  सब  लूल्ह आ  नांगर
चोकटल मुँह आ सटकल पाँजर
काजर लेपल बगए में लागै,
सब के स'ब भुताह
गौड़ी जुनि करु...............

घ'र  दुआरिक  कहां  ठेकाने
अप्पन दिन त' बितनि मशाने
अहाँ महल के राजदुलारी,
कतअ कोना रखताह
गौड़ी जुनि करु................

भाँग-धतुर विष अपने खएता
आहाँ लए  की भोजन लएता
माँगि-चाँगि निज पेट पोसै छथि,
आहां लए कथी बेसाह
गौड़ी जुनि करु................

हे  गौड़ा   एक  क'हब  मानु
भाग-सोहाग अपन धरि जानु
गे दैया नहिं देखल कहियो,
ब'र एहेन बौराह
गौड़ी जुनि करु...............
गौड़ी जुनि करु...............

                                      ✍👤अमित पाठक 


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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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