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एक त अल्हड़ यौवन हसीना

एक त अल्हड़ यौवन हसीना 


✍👩अदिति झा

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एक त अल्हड़ यौवन हसीना
ओहि पर आयल फाग महीना
एम्हर तू आबै गै ने आब तरसाबै गै
कि आबिकऽ सटि जो हमर सीना
एक त••••••••

फाग वसंती हवा सँ मन हम्मर बौड़ायल
यौवन तोहर गे गोड़िया दिल के चैन चोड़ायल
कि तू  छैं हीरा जड़ल नगीना
कि तोरा देखि कऽ धड़कय सीना
कि नैन मिलाबै गै कि मुश्की लाबै गै
कि तोरा देखि क छुटय पसीना
एक त••••••••••••

हम्मर तोहर प्रेमक खिस्सा पसरल सगर जहान मे
रुप सिंधु तु गे गोड़िया बसि तुँ गेलैं जान मे
कि आब त मोनो अछि ने काबू
कि चल गे प्रेम कलश भरि लाबू
कि घर मे आबै गै कि बड़ बनाबै गै
कि फागुन साथे रहिकय जीना
एक त•••••••••••••।।



✍👩अदिति झा


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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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