अंग अंग फगुआयल छै
अंग अंग फगुआयल छै
✍👤 Kislay krishna
अंग अंग फगुआयल, सिहकैत बासंती बसात छै.
हे प्रिये, देखू उल्लसित मिथिलाक केहेन प्रभात छै.
मलिन मेघ़क ओइ ओर पर भ गेलाहें चंद्रमा ..
नहुऐं सँ छिटैक रहलै,सगरे सुरूजक लालिमा..
मोन बहकल सुनिकें चहकल जे चिड़ै चुनमुनी...
घंटी बाजल बरद केर आ बाछी केर रुनझुनी...
कलकल करैत ई धार, बिहुँसैत कोशीक कात छै.
हे प्रिये, देखू उल्लसित मिथिलाक केहेन प्रभात छै.
ओस भीजल दूभि आ सागसँ कियारी भरल...
हरबाह उठि भोरे को ना हर ल कें खेत चलल..
अहीं कहू ई दृश्य एहेन भेटत कतय प्रवास मे..
गाम बाट जोहि रहल,हमरे अहाँक. आस मे ..
किसलय रहू मिथिले बसू,कहैत गाछ आ पात छै..
हे प्रिये, देखू उल्लसित मिथिलाक केहेन प्रभात छै.
✍👤 Kislay krishna
Facebook में सम्पर्क करि 👉 https://www.facebook.com/kislay.krishna
🌷🌷🌷💚💚💚💚🌷🌷🌷🌷💚💚💚💚🌷🌷🌷💚
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
💓💓💓💓🌷🌷🌷🌷🌷💓💚💚💚💚💚💚💓💓💟
💟💟
✍👤 Kislay krishna
अंग अंग फगुआयल, सिहकैत बासंती बसात छै.
हे प्रिये, देखू उल्लसित मिथिलाक केहेन प्रभात छै.
मलिन मेघ़क ओइ ओर पर भ गेलाहें चंद्रमा ..
नहुऐं सँ छिटैक रहलै,सगरे सुरूजक लालिमा..
मोन बहकल सुनिकें चहकल जे चिड़ै चुनमुनी...
घंटी बाजल बरद केर आ बाछी केर रुनझुनी...
कलकल करैत ई धार, बिहुँसैत कोशीक कात छै.
हे प्रिये, देखू उल्लसित मिथिलाक केहेन प्रभात छै.
ओस भीजल दूभि आ सागसँ कियारी भरल...
हरबाह उठि भोरे को ना हर ल कें खेत चलल..
अहीं कहू ई दृश्य एहेन भेटत कतय प्रवास मे..
गाम बाट जोहि रहल,हमरे अहाँक. आस मे ..
किसलय रहू मिथिले बसू,कहैत गाछ आ पात छै..
हे प्रिये, देखू उल्लसित मिथिलाक केहेन प्रभात छै.
✍👤 Kislay krishna
Facebook में सम्पर्क करि 👉 https://www.facebook.com/kislay.krishna
🌷🌷🌷💚💚💚💚🌷🌷🌷🌷💚💚💚💚🌷🌷🌷💚
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
💓💓💓💓🌷🌷🌷🌷🌷💓💚💚💚💚💚💚💓💓💟
💟💟

कोई टिप्पणी नहीं