राजा , जिनक वैभव सँ इन्द्र के ईर्ष्या होइत छलैन्ह !
राजा , जिनक वैभव सँ इन्द्र के ईर्ष्या होइत छलैन्ह !
मैथिलि अनुवाद :- नीरज मिश्र "मुन्नू "
मिथिला के नामक रहस्य, जनक के जन्म आदि सँ जुड़ल रोचक तथ्य पढ़ु अहि लेख में :-
कहल जैत अछि कि मिथिला राज्य जे की प्राचीन भारत के सोलह महाजनपद अर्थात राज्य में सँ एक छल अपन भव्यता आ सम्पन्नता के लेल जानल जैत छल | महान राजा जनक के धन आ वैभव केर चर्चा इंद्र तक कें ईर्ष्या सँ भैर दै छल |
जनक के जन्म आ मिथिलाक उदभव...
जनक के पूर्वज निमि एक बेर बहुत विशाल यज्ञक आयोजन केलनि | जाहिमे पुरोहित्य के लेल गुरु बशिष्ठ कें आमंत्रण पठाओल गेलनि | मुदा बशिष्ठ ओहि समय देवराज इन्द्र के संग यज्ञ में व्यस्त छलाह जाहि कारण ओ निमि के आमंत्रण स्वीकार करय में असमर्थता जतेलनि | एमहर निमि गौतम आ अन्य ऋषि-मुनि केर सहायता सँ यज्ञ शुरू करा देलथिन | निमि के अहि व्यवहार सँ गुरु बशिष्ठ बहुत क्रोधित भ गेलाह| क्रोध में आबि बशिष्ठ निमि के भस्म भs जेबाक शाप द देलथिन आ प्रत्युतर में निमि सेहो बशिष्ठ के भस्म भ जेबाक शाप द देलनि | जकर फलःस्वरुप दुनु गोटे भस्म भ गेलाह |
ऋषि- मुनी यज्ञक समाप्ति तक एकटा विशेष उपचार के द्वारा निमि के शरीर के सुरक्षित रखलनि | निमि के कोनो सन्तान नै छलैन्ह| देवता आ ऋषि-मुनि अहि बात सँ चिंतित भ गेलाह कि निमि केर राज-पाट आब के देखत | अतः ओ सब अरनि सँ हुनक मृत शरीरक मंथन केलनि| मंथन सँ एकटा पुत्रक प्राप्ति भेलनि | यैह पुत्र जनक भेलाह| चुकि हिनक जन्म शरीर के मंथन सँ भेल छल, ताहि हिनका ‘मिथि’ सेहो कहल जाइत छल| हिनक जन्म मृत शरीर सँ हेबाक कारण यैह पुत्र जनक , बिना शरीर अर्थात बिना देह के जन्म लेबाक के कारण वैदेह आ मंथन सँ उत्पन्न हेबाक कारण ओहि बालक केर नाम ‘मिथिल’ भेल | अहि आधार पर मिथिलापुरी केर स्थापना भेल|
महान विद्वान् सेहो छलाह जनक
शीराध्वज जनक सिर्फ बहादुर टा नहि छलाह बल्कि ओ शास्त्र आ वेद के प्रकांड विद्द्वान सेहो छलाह | कोनो ऋषि-मुनि हुनका सँ शास्त्रार्थ में जीत नहि सकल छलाह|राजा जनक अपन गुरु याज्नावाल्क्य के सबसँ प्रिय शिष्य छलाह |शीरध्व्ज जनक उन्नत अध्यात्म के ज्ञाता छलाह जाहि कारण हुनको राजर्षि कहल गेल | यद्यपि ओ मिथिला राज्य के एकटा कुशल शासक सेहो छलाह| मिथिला राज्यक राजधानी जनकपुर छल | जे वर्तमान में नेपाल देश में अवस्थित अछि | महाकाव्य, रामायण आ महाभारत के अनुसार राजा जनक अपन राजधानी जनकपुरहि सँ विदेह राज्य पर शासन चलबैत रहथि | जे कि हिमालय पर्वतक तर में अवस्थित छल|
शीरध्वज जनक सीता के पिता छलाह| एतेक बड़का विद्वान् भेलाक पश्चातो ओव सन्यासी सन जीवन व्यतीत करैत छलाह |यद्यपि ओ एकटा महान राजा छलाह तथापि ओ साधू संतक संग धार्मिक सम्बाद कयल करैत छलाह |महर्षि नारद सेहो जनक सँ शिक्षा ग्रहण केने छलाह |
अनुवाद :✍👤 नीरज मिश्र मुन्नू
मूल लेख ( हिंदी) मिथिलाकनेक्ट.कॉम
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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मिथिला के नामक रहस्य, जनक के जन्म आदि सँ जुड़ल रोचक तथ्य पढ़ु अहि लेख में :-
कहल जैत अछि कि मिथिला राज्य जे की प्राचीन भारत के सोलह महाजनपद अर्थात राज्य में सँ एक छल अपन भव्यता आ सम्पन्नता के लेल जानल जैत छल | महान राजा जनक के धन आ वैभव केर चर्चा इंद्र तक कें ईर्ष्या सँ भैर दै छल |
जनक के जन्म आ मिथिलाक उदभव...
जनक के पूर्वज निमि एक बेर बहुत विशाल यज्ञक आयोजन केलनि | जाहिमे पुरोहित्य के लेल गुरु बशिष्ठ कें आमंत्रण पठाओल गेलनि | मुदा बशिष्ठ ओहि समय देवराज इन्द्र के संग यज्ञ में व्यस्त छलाह जाहि कारण ओ निमि के आमंत्रण स्वीकार करय में असमर्थता जतेलनि | एमहर निमि गौतम आ अन्य ऋषि-मुनि केर सहायता सँ यज्ञ शुरू करा देलथिन | निमि के अहि व्यवहार सँ गुरु बशिष्ठ बहुत क्रोधित भ गेलाह| क्रोध में आबि बशिष्ठ निमि के भस्म भs जेबाक शाप द देलथिन आ प्रत्युतर में निमि सेहो बशिष्ठ के भस्म भ जेबाक शाप द देलनि | जकर फलःस्वरुप दुनु गोटे भस्म भ गेलाह |
ऋषि- मुनी यज्ञक समाप्ति तक एकटा विशेष उपचार के द्वारा निमि के शरीर के सुरक्षित रखलनि | निमि के कोनो सन्तान नै छलैन्ह| देवता आ ऋषि-मुनि अहि बात सँ चिंतित भ गेलाह कि निमि केर राज-पाट आब के देखत | अतः ओ सब अरनि सँ हुनक मृत शरीरक मंथन केलनि| मंथन सँ एकटा पुत्रक प्राप्ति भेलनि | यैह पुत्र जनक भेलाह| चुकि हिनक जन्म शरीर के मंथन सँ भेल छल, ताहि हिनका ‘मिथि’ सेहो कहल जाइत छल| हिनक जन्म मृत शरीर सँ हेबाक कारण यैह पुत्र जनक , बिना शरीर अर्थात बिना देह के जन्म लेबाक के कारण वैदेह आ मंथन सँ उत्पन्न हेबाक कारण ओहि बालक केर नाम ‘मिथिल’ भेल | अहि आधार पर मिथिलापुरी केर स्थापना भेल|
महान विद्वान् सेहो छलाह जनक
शीराध्वज जनक सिर्फ बहादुर टा नहि छलाह बल्कि ओ शास्त्र आ वेद के प्रकांड विद्द्वान सेहो छलाह | कोनो ऋषि-मुनि हुनका सँ शास्त्रार्थ में जीत नहि सकल छलाह|राजा जनक अपन गुरु याज्नावाल्क्य के सबसँ प्रिय शिष्य छलाह |शीरध्व्ज जनक उन्नत अध्यात्म के ज्ञाता छलाह जाहि कारण हुनको राजर्षि कहल गेल | यद्यपि ओ मिथिला राज्य के एकटा कुशल शासक सेहो छलाह| मिथिला राज्यक राजधानी जनकपुर छल | जे वर्तमान में नेपाल देश में अवस्थित अछि | महाकाव्य, रामायण आ महाभारत के अनुसार राजा जनक अपन राजधानी जनकपुरहि सँ विदेह राज्य पर शासन चलबैत रहथि | जे कि हिमालय पर्वतक तर में अवस्थित छल|
शीरध्वज जनक सीता के पिता छलाह| एतेक बड़का विद्वान् भेलाक पश्चातो ओव सन्यासी सन जीवन व्यतीत करैत छलाह |यद्यपि ओ एकटा महान राजा छलाह तथापि ओ साधू संतक संग धार्मिक सम्बाद कयल करैत छलाह |महर्षि नारद सेहो जनक सँ शिक्षा ग्रहण केने छलाह |
अनुवाद :✍👤 नीरज मिश्र मुन्नू
मूल लेख ( हिंदी) मिथिलाकनेक्ट.कॉम
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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