संस्कार गीत
(संस्कार गीत)
✍👤अमित पाठक
ललन ने कानै हजमा, खसै नहि नोर रे-२
परम दुलारु ललना हमर बेजोड़ रे-२
...
केश ललन के काटिहें रे तों कैंची ल' क'धीरे सँ
एकर परतर नै दुनियाँ में सोना रूपा हीरे सँ
गाम के रतन धन ललन अनमोल रे-२
परम दुलारु ललना.........
पाहुन सब सँ घर भरल अछि एला गामक दूरे सँ
मामी मौसीक मोटरी भरल भीखक चूड़ा गूड़े सँ
दोग में नुका क' बैसल मामा चुगलचोर रे
परम दुलारु ललना..........
बेर भेलै चुमाउनक हजमा हेतै विध ई बौआ के
सबसँ आगु के बढ़ि जैता खेल एतय छै ढौआ के
झुकि-झुकि लागै बौआ नाना के गोर रे-२
परम दुलारु ललना.........
मिथिला नगरिक रीत सदा सँ होइछ चर्चा जग भरि में
वंशक पूत जकर घर जनमल होइ ई परोजन ओहि घर में
देखि-देखि सबहक मोन विभोर रे-२
परम दुलारु ललना...........
ललन ने कानै हजमा.........
गीतकार ✍👤अमित पाठक
पोस्ट आ फोटो :- मिथिला संस्कार पेज सँ सभार
💓💓💓💓💓💓💓💟💟💟💟💟
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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| फोटो मिथिला संस्कार पेज सँ |
✍👤अमित पाठक
ललन ने कानै हजमा, खसै नहि नोर रे-२
परम दुलारु ललना हमर बेजोड़ रे-२
...
केश ललन के काटिहें रे तों कैंची ल' क'धीरे सँ
एकर परतर नै दुनियाँ में सोना रूपा हीरे सँ
गाम के रतन धन ललन अनमोल रे-२
परम दुलारु ललना.........
पाहुन सब सँ घर भरल अछि एला गामक दूरे सँ
मामी मौसीक मोटरी भरल भीखक चूड़ा गूड़े सँ
दोग में नुका क' बैसल मामा चुगलचोर रे
परम दुलारु ललना..........
बेर भेलै चुमाउनक हजमा हेतै विध ई बौआ के
सबसँ आगु के बढ़ि जैता खेल एतय छै ढौआ के
झुकि-झुकि लागै बौआ नाना के गोर रे-२
परम दुलारु ललना.........
मिथिला नगरिक रीत सदा सँ होइछ चर्चा जग भरि में
वंशक पूत जकर घर जनमल होइ ई परोजन ओहि घर में
देखि-देखि सबहक मोन विभोर रे-२
परम दुलारु ललना...........
ललन ने कानै हजमा.........
गीतकार ✍👤अमित पाठक
पोस्ट आ फोटो :- मिथिला संस्कार पेज सँ सभार
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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