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मोन होइए मैथिलीएमे पढितौ

मोन होइए मैथीलीएमे पढ़ितौ


✍👤विधानन्द वेदर्दी

हे हौ सरकार! केहेन ई पढाइ?
बनल य हमरा लेल कसाइ।
रटऽ नै पडितै,झट्ट दऽ बुझितौ,
मोन होइए मैथिलीएमे पढितौ॥

नर्सरी सँ दशधरि रटैत एलहुँ,
रटि-रटिके परिक्षा दैत एलहुँ,
सब दिन सँ तऽ फस्ट भेलहुँ,
तैयो नै हम सन्तुष्ट भेलहुँ,
मैट्रिकमे सेहो डिस्टिनस्न कटेलहुँ,
मुदा खूशी हम किदन नै भेलहुँ,
'क' सँ काँकोर 'त' सँ तिलकोर,
नन्हिए सँ सिलेठी पर लिखितौ॥
मोन होइए मैथिलीएमे पढितौ..

मैथिली बाजैत क्या बेर पकडेलौ,
मास्टर सँ नै हेड मास्टर सँ पिटेलौ,
कान पकडि डन्ट बैसकी केलौ,
कहियो झापड कहियो कैरची खेलौ,
देहमे नै यौ, आत्मामे लागैत छल लाइत,
जँ माएक बोल बाजि,छलौ मारि खाइत,
"सयौँ थुँगा फूलका हामी"के संग,
"मैथिल वीर जवान छी" गाबितौ॥
मोन होइए मैथिलीएमे पढितौ...

मैथिली पढब-बाजब निषेध किए?
मातृभाषाक संग एना विभेद किए?
मा. वि. क्षेत्रमे एहेन सुकार्य हो,
मैथिली एच्छिक नै अनिवार्य हो,
जँ मनोरथ ई पुर्ण कोइ कऽ दथि,
हुनका कोटी-कोटी नमन करितौ॥
मोन होइए मैथिलीएमे पढितौ..
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✍👤विद्यानन्द वेदर्दी

लेखकः- विधानन्द वेदर्दी  जी


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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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