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जनने छलहुँ ने प्रेमक, एहन लाइग होइ छै

जनने छलहुँ ने प्रेमक एहन लाइग होइ छै
💐💐💐मैथीली गीत 💐💐💐💐💐


✍👤श्री अशोक दत्त 

जनने छलहुँ ने प्रेमक, एहन लाइग होइ छै
हँसैत जराबे पल–पल, एहन आगि होइ छै

हुनकर नयन कटार, हृदयमे एना गड़ल
भेटऽ लेऽ हुनका सदिखन, रहए टीस सन बनल
छै कोन एहन जादू, हमर चैन हरि लेलक
ने सूतिए सकै छी कखनो, नइँ जागि होइ छै
जनने छलहुँ ने प्रेमक ..........

कोमल गुलाबक पँखुरी, जेना शीतसँ भीजल
हुकर मुस्की लागे तहिना खीलल–खीलल
हुनकासँ दूर रहि कऽ भेल जीयब हमर दुभर
अछि सत्य ई एहन जे, नइँ भागि होइ छै
जनने छलहुँ ने प्रेमक ..........

पानिक अभाबे फाटल, धरती रहए जेना
ओ ने रहथि संग तऽ, हमहूँ रही तेना
सिहकैत पवन तों जा कऽ, प्रियासँ आइ कहिदे
बिछोहक बियोगे फाटल, हिया ने तागि होइ छै
जनने छलहुँ ने प्रेमक ...........

✍👤श्री अशोक दत्त
जनकपुर ,धनुषा ,नेपाल,


लेखकः - श्री अशोक दत्त जी 







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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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