खूनक शहीदक निश्चय देखबै, अपन रंग लएबे करतै
खूनक शहीदक निश्चय देखबै, अपन रंग लएबे करतै
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| मधेशी शाहिद आओकर परिवार सब छबि में |
✍👤अशोक दत्त
प्रिय हताश जूनि होउ अहाँ, प्रेम दीप बरबे करतै
छैक निशा घनघोर अखन, हँसैत भोर हएबे करतै
आहत धरा ई सन्तानेसँ अछि अखन सिसकि रहल
खण्ड–खण्डमे बँटाएल देख, आँखिसँ नोर बहबे करतै
जाति–धर्मक अगराहीमे आइ चाहे अछि झरकि रहल
आरि तोडि़ पहिचानक खातिर, सब संग अएबे करतै
काँट–कुश रोड़ा–पाथर सब साफ करैत बढि़ते चलू
अज्ञानक देबाल बाधक जे, देखबै से ढहबे करतै
उपद्रव चाहे लाख करओ हारि ने किन्नहु मानऽके छै
खूनक शहीदक निश्चय देखबै, अपन रंग लएबे करतै
✍👤अशोक दत्त
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| कवि- अशोक दत्त जी |
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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