।।जो रे सुगना विदेश।। 🎊फगुवा क गीत🎊
।।जो रे सुगना विदेश।।
🎊फगुवा क गीत🎊
✍👤सुबोध चौधरी
फगुवा एलैया फेरो मन जरै छै,
हमर पिया परदेश बसै छै।
जो रे ऊरि जो रे सुगना विदेश,
कहिहैं पियाकेँ संदेश रे।
*
कहिहैं बितै नै छै फागुन के रतिया,
केकरासँ कहबै मनक सभ बतिया।
घुरि आबै ला कहिहैं स्वदेश रे।
जो रे ऊरि जो रे सुगना....
*
बरख बितल एलै फागुन सोहाबन,
केनाक बिसरलै पिया मनभावन।
हम धेलियै बिरहन केर भेष रे।
जो रे ऊरि जो रे सुगना....
*
सखी बहिनपा रंग खेलाबै,
अपन पियाजीकेँ अंग लगाबै।
हम रंग राखने सहेज रे।
जो रे ऊरि जो रे सुगना....
*
जँ पिया सुबोध अउथिन अंगना,
सुगना रे देबौ सोनाक कंगना।
संग देबौ मिठगर सनेस रे।
जो रे ऊरि जो रे सुगना....
✍👤सुबोध चौधरी
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌷🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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🎊फगुवा क गीत🎊
✍👤सुबोध चौधरी
फगुवा एलैया फेरो मन जरै छै,
हमर पिया परदेश बसै छै।
जो रे ऊरि जो रे सुगना विदेश,
कहिहैं पियाकेँ संदेश रे।
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कहिहैं बितै नै छै फागुन के रतिया,
केकरासँ कहबै मनक सभ बतिया।
घुरि आबै ला कहिहैं स्वदेश रे।
जो रे ऊरि जो रे सुगना....
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बरख बितल एलै फागुन सोहाबन,
केनाक बिसरलै पिया मनभावन।
हम धेलियै बिरहन केर भेष रे।
जो रे ऊरि जो रे सुगना....
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सखी बहिनपा रंग खेलाबै,
अपन पियाजीकेँ अंग लगाबै।
हम रंग राखने सहेज रे।
जो रे ऊरि जो रे सुगना....
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जँ पिया सुबोध अउथिन अंगना,
सुगना रे देबौ सोनाक कंगना।
संग देबौ मिठगर सनेस रे।
जो रे ऊरि जो रे सुगना....
✍👤सुबोध चौधरी
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| गीतकार :- सुबोध चौधरी जी |
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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