भने बिसरि पिया अहाँ शहरिया बितेबै यौ
लोक-धून ---
भने बिसरि पिया अहाँ शहरिया बितेबै यौ
✍👤मैथिल प्रशांत
कुहु-कुहु बाजै कोइलिया --
सजन कोना भोररिया बितेबै यौ ।
ढेकी नै जाँते उसकायब नै झिके --
मिक्सीकेँ घर्र-घर्र कोना दुपहरिया बितेबै यौ ।।
पूनमकेँ राइत आबय पोतने सियाही ।
एक्के संग नेहमे अएल रौदी आ दाही ।।
छह-छह जुआनीक इजोरिया पहाड़ सन --
सोचू कोना गुज-गुज अन्हरिया बितेबै यौ ।
चिट्ठीक बाट जोहैत कटै छल बरखो ।
फोनक अनोन बात दैइए कि हरखो ।।
लगनी बिसैर मोन गाबैए विरहा ----
कहू प्राणनाथ जिनगी एकहरिया बितेबै यौ ।
कोरामे एकटा सोना ललन दय गेलियै ।
मूड़न उपनयनोमे गाम नहि एलियै ।।
चिल्का खेलाबी आ मोनकेँ परतारी --
भने बिसरि पिया अहाँ शहरिया बितेबै यौ ।
~> मैथिल प्रशान्त
दुर्गौली, बेनीपट्टी ।।
भने बिसरि पिया अहाँ शहरिया बितेबै यौ
✍👤मैथिल प्रशांत
कुहु-कुहु बाजै कोइलिया --
सजन कोना भोररिया बितेबै यौ ।
ढेकी नै जाँते उसकायब नै झिके --
मिक्सीकेँ घर्र-घर्र कोना दुपहरिया बितेबै यौ ।।
पूनमकेँ राइत आबय पोतने सियाही ।
एक्के संग नेहमे अएल रौदी आ दाही ।।
छह-छह जुआनीक इजोरिया पहाड़ सन --
सोचू कोना गुज-गुज अन्हरिया बितेबै यौ ।
चिट्ठीक बाट जोहैत कटै छल बरखो ।
फोनक अनोन बात दैइए कि हरखो ।।
लगनी बिसैर मोन गाबैए विरहा ----
कहू प्राणनाथ जिनगी एकहरिया बितेबै यौ ।
कोरामे एकटा सोना ललन दय गेलियै ।
मूड़न उपनयनोमे गाम नहि एलियै ।।
चिल्का खेलाबी आ मोनकेँ परतारी --
भने बिसरि पिया अहाँ शहरिया बितेबै यौ ।
~> मैथिल प्रशान्त
दुर्गौली, बेनीपट्टी ।।
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| कवि - मैथिल प्रशांत |


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