हे हमर प्रिये भोला-भाला जनता(स्वतन्त्र)
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स्वतन्त्र
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हे हमर प्रिये भोला-भाला जनता
✍👤नरायण मधुशाला
जगाक राखी अपन भितर चेतना
हे हमर प्रिये भोला-भाला जनता
कखनो कोनो घटि सकैय घटना
अपनो जागी दोसरोके जगाबी
कहुना मातृभूमीक अस्तिव बचाबी
ककरो स्वतन्त्रतामे नै टाँग अड़ाबी
खुश रही ओतबेमे, जते भेटे अपना
एहनो उताब-चढाब आबि सकैय
अहाँक स्वतन्त्रता बन्हकी पडि सकैय
घर आँगनमे दलाल हुलि सकैय
नोरेझोरे भिजा सकैय नयनमा
बदलैत निती सबकोईके सम्झाबु
मुरुखोके एक भोटक महिमा बताबु
किन्को नै दास बनब स्वीकारु
पराधीन होयब तऽ छिडियायत सपना
एक मत कतेकोके घर उजाड़ि सकैय
कतेक अभागाके जीवन तारि सकैय
कतेक सपुतक खून ओ बहाबि सकैय
जराबि सकैय घर-दुआर कतना
पेटसँ बेसी भेलाप स्वीस बैँक भड़ि आएत
देशक भाषा कला सँस्कृती बेचि जाएत
सब मान सम्मानके तहस नहस करि जाएत
पेट पोसा अधकी खस नेता चटना
कोनो खसके नै माथ पर चढाबु
मालिक नै घरक पाहुनटा बनाबु
अपन घरक नै कोनो खजाना देखाबु
नैत चाटि पोछि लऽ जाएत, रहत जतना
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✍👤नरायण मधुशाला
स्वतन्त्र
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हे हमर प्रिये भोला-भाला जनता
✍👤नरायण मधुशाला
जगाक राखी अपन भितर चेतना
हे हमर प्रिये भोला-भाला जनता
कखनो कोनो घटि सकैय घटना
अपनो जागी दोसरोके जगाबी
कहुना मातृभूमीक अस्तिव बचाबी
ककरो स्वतन्त्रतामे नै टाँग अड़ाबी
खुश रही ओतबेमे, जते भेटे अपना
एहनो उताब-चढाब आबि सकैय
अहाँक स्वतन्त्रता बन्हकी पडि सकैय
घर आँगनमे दलाल हुलि सकैय
नोरेझोरे भिजा सकैय नयनमा
बदलैत निती सबकोईके सम्झाबु
मुरुखोके एक भोटक महिमा बताबु
किन्को नै दास बनब स्वीकारु
पराधीन होयब तऽ छिडियायत सपना
एक मत कतेकोके घर उजाड़ि सकैय
कतेक अभागाके जीवन तारि सकैय
कतेक सपुतक खून ओ बहाबि सकैय
जराबि सकैय घर-दुआर कतना
पेटसँ बेसी भेलाप स्वीस बैँक भड़ि आएत
देशक भाषा कला सँस्कृती बेचि जाएत
सब मान सम्मानके तहस नहस करि जाएत
पेट पोसा अधकी खस नेता चटना
कोनो खसके नै माथ पर चढाबु
मालिक नै घरक पाहुनटा बनाबु
अपन घरक नै कोनो खजाना देखाबु
नैत चाटि पोछि लऽ जाएत, रहत जतना
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✍👤नरायण मधुशाला
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| कवि - नरायण मधुशाला जी |


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