बरखाक मौसम एलै चारो चुबैत हेतै(मैथिलि गजल)
बरख़ाक मौसम एलै चारो चुबैत हेतै
✍👤अनिल मल्लिक
ई मोन अहिँके सदिखन धेआन धरै छै
देखबा लेल अँहिँके ई परेशान रहै छै
लोकक लेल हेतै सुन्दर पूनमके चान
यै सजनी ई अहिँके अप्पन चान कहै छै
ओ मधूर दिन जे सँगे बितओने छलहुँ
यादि करैत परदेशमें ई जान खटै छै
बरखाक मौसम एलै चारो चुबैत हेतै
माटिक कोठी बचाउ ओहिमें धान रहै छै
घरक चिन्ता अछि की लगतै भूखो पिआस
नीकसँ रहू अँहिँमेँ हम्मर प्राण बसै छै ...!
-----✍👤अनिल मल्लिक
✍👤अनिल मल्लिक
ई मोन अहिँके सदिखन धेआन धरै छै
देखबा लेल अँहिँके ई परेशान रहै छै
लोकक लेल हेतै सुन्दर पूनमके चान
यै सजनी ई अहिँके अप्पन चान कहै छै
ओ मधूर दिन जे सँगे बितओने छलहुँ
यादि करैत परदेशमें ई जान खटै छै
बरखाक मौसम एलै चारो चुबैत हेतै
माटिक कोठी बचाउ ओहिमें धान रहै छै
घरक चिन्ता अछि की लगतै भूखो पिआस
नीकसँ रहू अँहिँमेँ हम्मर प्राण बसै छै ...!
-----✍👤अनिल मल्लिक

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