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देखू गहगह तिलकक फेर ! (दहेज़ प्रथाक व्यथा गीत )

💐देखू गहगह तिलकक फेर !
(दहेज़ प्रथाक व्यथा गीत )


✍👤शिव कुमार झा 'टिल्लू '
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झाँपि झाँपि आँखि कानथि वैदेही 
मिथिलामे अन्हेर 
देखू गहगह तिलकक फेर !
नोर सानि माय ब'ड़ी खोंटथि
नहि बेसनके टेर
पांच वसन नहि पुरल सगुन लेल 
निर्धन बाप बहेर 
देखू गहगह तिलकक फेर !
भरल चास खेत बन्हक रखलनि 
सेठ चुआबथि लेर 
वरन लगिच छनि  सोचि सोचिक' 
काल रहल अछि  घेर 
देखू गहगह तिलकक फेर !
सीता छलि समरथके बेटी 
स्वयंबरमे वीर- ढ़ेर 
साध्य भंवर किल्होर करै छथि 
साधनहीन कछेर 
देखू गहगह तिलकक फेर !
दीनक घरमे अहोराति अछि 
आशने होयत सबेर
आबहु जागथु मैथिल यौवन 
भेलै बहुत अबेर 
देखू गहगह तिलकक फेर !

कवि - शिव कुमार झा 'टिल्लू' जी


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