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राति- राति भरि अहाँ के याद मे तकिया हमर भिजैय

💐साजन अहाँके यादमे 💐





✍👤दिनेश कुमार राम 


कि कहु,कोना कहु अहाँ बिनु साजन चैन नै हमरा अबैय!
राति- राति भरि अहाँ के याद मे तकिया हमर भिजैय!!

केतेक सताएब हमरा यौ साजन, आब त करेजा फटैय!
आएब कहिया जल्दी बताबू अहाँ के याद बड अबैय!!

कापी कलम जखने लै छी आँखि सँ नोर हमरा खसैय!
कोना लिखु हम अहाँ के चिट्ठी कनिको नै निक लगैय!!

राति भरि जागिक याद करैछी, निन्द नै हमरा अबैय!
साचे कहै छी यौ हमर साजन,  अहाँ के याद बड तडपबैय!!

कहने छलौँ जे मिल' आइब, मिल'  नै अहाँ अबैछी !! 
अहीँ के बाट देखिते देखिते नोर सँ आँखि हमर भिजैय!!

✍👤दिनेश कुमार राम 
सुगा मधुकरही -६ धनुषा 
हाल: दोहा, कतार

कवि - दिनेश कुमार राम जी। 












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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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