जानकी मन्दिरके विश्व सम्पदा सूचीमे सूचीकृत कराब स्थानीयके माग
जानकी मन्दिरके विश्व सम्पदा सूचीमे सूचीकृत कराब स्थानीयके माग
अशोक कुमार सहनी, दोहा कतार, अपन मिथिला/चैत्र–२२ गते,मिथिलाक प्राचीन राजधानी जनकपुरके जानकी मन्दिरके विश्व सम्पदा सूचीमे सूचीकृत कराब जनकपुरवासीसभ सरकारसँ माग कएलकअछि ।
जानकी मन्दिरके विश्व सम्पदामे सूचीकृत कराब स्थानीय स्तरसँ पहल होईत अएलाकऽबादो सरकार अग्रसरता नै लेने ओसभ उपराग देनेअछि । करिब चारि सय वर्षके इतिहास बोक्ने जनकपुर शहरमे रहल जानकी मन्दिरके इतिहास एक सय ५० वर्षसँ उपर रहलअछि । मुद्दा, मन्दिर अखनधरि विश्व सम्पदा सूचीमे स्थान पाब नै सकलअछि ।
राजा मणिक सेन १७८४ सालमे एक हजार ४ सय बिघा सीतारामके भोगरागके लेल जमिन दान कएनेछलथि। अहिना, १७९० साल फागुन ७ गतेके दिन हेमकर्ण सेन जग्गाके सिमाना गुठी थामिदेने आ नेपालके एकीकरणबाद पृथ्वीनारायण शाहसँ उक्त जग्गा कुशविर्ताके रुपमे उपलब्ध करौने १८६७ सालके गिर्वाणयुद्ध वीरविक्रम शाहके लालमोहरमे उल्लेखित अछि ।
सीताके जन्मभूमि समेत रहल जनकपुरके जानकी मन्दिर हिन्दुसभक पवित्र धार्मिक स्थलके रुपमे परिचित अछि । जानकी मन्दिरके विश्व सम्पदा सूचीमे सूचीकृत कराब समुदाय स्तरसँ विभिन्न अभियान सञ्चालन कएलाकऽबादो अयसँ ठोस रुप लेब नै सकलअछि ।
जानकी मन्दिरके ट्रष्टके रुपमे विकास कऽक विश्व सम्पदा सूचीके लेल पहल बढाबऽपर्वाक स्थानीय बुद्धिजीवीके कहबअछि । आवश्यक संरचनाके विकास कऽ जानकी मन्दिरके विश्व सम्पदामे सूचीकृत करौलक तँ जनकपुरमे पर्यटन प्रवद्र्धनमे समेत सहयोग हेवाक स्थानीयके अपेक्षा अछि ।
जानकी मन्दिर नौलखा, जानकी भवन आ शिशमहल नामसँ सेहो प्रख्यात अछि । मुगल वास्तुशैली आ हिन्दू वास्तुशैलीके सङ्गमसँ बनल ओे मन्दिर वास्तु कलाकारिताके नमूना समेत उजागर करतिअछि । ४९ हजार ५ सय ५५ वर्गफिटमे फैलल ओ मन्दिर करिब ५० फिट के उचाईमे रहलअछि ।
अशोक कुमार सहनी, दोहा कतार, अपन मिथिला/चैत्र–२२ गते,मिथिलाक प्राचीन राजधानी जनकपुरके जानकी मन्दिरके विश्व सम्पदा सूचीमे सूचीकृत कराब जनकपुरवासीसभ सरकारसँ माग कएलकअछि ।
जानकी मन्दिरके विश्व सम्पदामे सूचीकृत कराब स्थानीय स्तरसँ पहल होईत अएलाकऽबादो सरकार अग्रसरता नै लेने ओसभ उपराग देनेअछि । करिब चारि सय वर्षके इतिहास बोक्ने जनकपुर शहरमे रहल जानकी मन्दिरके इतिहास एक सय ५० वर्षसँ उपर रहलअछि । मुद्दा, मन्दिर अखनधरि विश्व सम्पदा सूचीमे स्थान पाब नै सकलअछि ।
राजा मणिक सेन १७८४ सालमे एक हजार ४ सय बिघा सीतारामके भोगरागके लेल जमिन दान कएनेछलथि। अहिना, १७९० साल फागुन ७ गतेके दिन हेमकर्ण सेन जग्गाके सिमाना गुठी थामिदेने आ नेपालके एकीकरणबाद पृथ्वीनारायण शाहसँ उक्त जग्गा कुशविर्ताके रुपमे उपलब्ध करौने १८६७ सालके गिर्वाणयुद्ध वीरविक्रम शाहके लालमोहरमे उल्लेखित अछि ।
सीताके जन्मभूमि समेत रहल जनकपुरके जानकी मन्दिर हिन्दुसभक पवित्र धार्मिक स्थलके रुपमे परिचित अछि । जानकी मन्दिरके विश्व सम्पदा सूचीमे सूचीकृत कराब समुदाय स्तरसँ विभिन्न अभियान सञ्चालन कएलाकऽबादो अयसँ ठोस रुप लेब नै सकलअछि ।
जानकी मन्दिरके ट्रष्टके रुपमे विकास कऽक विश्व सम्पदा सूचीके लेल पहल बढाबऽपर्वाक स्थानीय बुद्धिजीवीके कहबअछि । आवश्यक संरचनाके विकास कऽ जानकी मन्दिरके विश्व सम्पदामे सूचीकृत करौलक तँ जनकपुरमे पर्यटन प्रवद्र्धनमे समेत सहयोग हेवाक स्थानीयके अपेक्षा अछि ।
जानकी मन्दिर नौलखा, जानकी भवन आ शिशमहल नामसँ सेहो प्रख्यात अछि । मुगल वास्तुशैली आ हिन्दू वास्तुशैलीके सङ्गमसँ बनल ओे मन्दिर वास्तु कलाकारिताके नमूना समेत उजागर करतिअछि । ४९ हजार ५ सय ५५ वर्गफिटमे फैलल ओ मन्दिर करिब ५० फिट के उचाईमे रहलअछि ।

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