बैशाख २ गते में लागै वाल मेला अछि पकड़ियागढ़ , पतारी आ मानिकदह
बैशाख २ गते में लागै वाल मेला अछि पकड़ियागढ़ , पतारी आ मानिकदह
✍👤अशोक कुमार सहनी
अशोक कुमार सहनी, दोहा क़तार, अपन मिथिला/ बैशाख,२ गते
पकडियागढ ः ऐतिहासिक स्थान सिरहा जिल्लाके महत्वपूर्ण लहान वजार सँ ५ किलोमिटर उत्तर ग्रामिणक्षेत्रमें स्थित अछि ।ई स्थानमा करीव १५०० फीटके गोलाईमें फैलल पूरातात्विक स्थल छैथ । ई ठाम प्राचिन समयमें कुनो राजाके गढ छेल सेबात सहजै अनुमान कसकै छी । स्थानीय जनविश्वास अनुसार पकडियाके पूरातात्विक स्थल राजा कुलेश्वरके दरवार छेल । एहि कारण अगर ओत अखुनो खुनै के कामकेल गेल तs राजाके गद्दी भेटs सकै छै । गढके अगल बगल इटाके वनल देवाल अखुनो देखल जय सकै छै । स्थानीयवासीके अनुसार कुछ साल वर्ष पहिले ओ क्षेत्रमें १० इन्च लम्बाई आ दूइ इन्च मोटाइ भेल कुछ इटा भेटल छेल। गढके साइड में इटाके टुक्रासब बहुत भेटै छै । ई सब देखके अनुमान कs सकै छी कि ई ठाम कोनो पराक्रमी राजाके गढ छेल। गढमें एकटा मन्दिर पोखरीके पूर्व दिस सs अछि। ई मन्दिरमें राजा सलहेशके ई मन्दिरमें अछि एकटा प्रतिमा आ एकटा मूर्ती राखल अछि । राजा सलहेशके ई मन्दिरमें घोडापर चढेल प्रतिमा आ मूर्ति अछि। पकडिया गढमें राजा कुलेश्वर घोडामें सवार भेल एउट प्रतिमा आ मूर्ति सेहो अछि । पकडिया गढमें राजा कुलेश्वरके पूजा करै जय छै । ई समय २५ फिटके सुरुगं निर्माण केल गेल अछि । आ ओत पकडीयागढ महोत्सवके साथ में बैशाख २ गते मेला लगैत अछि। मधेशके अधिकांश जिल्लाके आ भारतके विहार के लोग मेला देखै लेल जयल करै य ।
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| पतारी पोखैर |
पतारी ः सिरहा जिल्लाके लक्ष्मीपुर गाविस में रहल पतारी पोखरी ऐतिहासिक महत्व भेल एक स्थल अछि । कहैय छै राजा कुलेश्वरके छोट भाई हरिसिंह देवके यत निवाश स्थान छेल । अखुन ई ठाम हरिसिंह देवके दरवार अछि। ओहि टाइम राजा रानीके प्रतिमा रहल स्थानीय जनविश्वास अछि। ई प्रतिमा जेका तs नै दिखैय छै मुदा दुइटा पथर पूजा जरूर करै छै। देखै में उ पथर पुरानका देखैय छै । ई ठाम दरवारके अगाडि एकटा पुरनका पोखैर अछि । सलहेश पूलवारी मेला देखै वाल भक्त सब पतारी जाके ओत स्नान करैत अछि, बेटा-बेटी नै भहरहल जिनका उ एहि ठाम मांग करैत नियमानुसार पतारी पोखैरमें डुबकी लगा:क जे भेटल ओहि चजी लके भिजल कपरा में जय परैय छै। कुछ दूर पूगल पर कपड़ा बदैल के घर जय छै ।से अखुनो लोग में विश्वास रहल अछि की ई पोखैरमे डुबकी लागेल से बच्चा होइत अछि ई आ भेल सेहो अछि । ई ठाम बैशाख २ गते मेला लगैत आरहल अछि । ई ठाम अखुनो खूनला सँ कुछ नया चीज सब भेट कसकै छै ।
मानिकदह ः सिरहा जिल्लाके लोकगाथासँग जुरल एक ऐतिहासिक स्थल अछि मानिकदह । ई ठाम ऐतिहासिक भेल तैयौ एकरा साँस्कृतिक स्थान के रुपमें देखैंत अछि। सिरहा जिल्लाके लहान सs १४ किलो मिटर उत्तर पश्चिम गोविन्दपुर गाविस में अछि मानिकदह । महिसौथाके सलहेश मन्दिर सs ई मानिकदह पूर्व तरफ अछि। ई दहके ऐतिहासिक विषयमें कोई कोई कहै छै की ई चौदण्डीके सेन राजा मनिक सेन बनेने अछि तs कोई कोई कहै छै साविक सs रहल ई दह जीर्णोद्धार के अछि से बताबैत अछि । नेपाल एक होइ से पहिले ई क्षेत्र सेनबंशी राजाके इलाका छेल । ई मानिकदह के नजदीक कतो अम्वरपूर नाम के ठाम छेल । जे पाछु सप्तरीके सदरमुकाम कायम भेल । चौदण्डीके सेनराजासब कुछ महिना जार काटै के लेल ई ठाम में आबै छेल। भसकै छै मानिकदहके सुन्दरता सs प्रभावित भके सेन राजासब मानिकदहके जीर्णोद्धार कके ई ठाम के नाम मानिकदह रखलक की। अखुन के समयम ई दहके ऐतिहासिकता सs बेशी धार्मिक महत्व अछि । लोकसबमे मान्यता की अछि की लोकनायक सलहेश सब दिन मानिकदहमें स्नान कके लहानके फूलवारीमें फूल तौइर के महिसौथा आके राजमाता आ कमलाजीके पूजा करै छेल । ई दह के कतौ नजदिक एकटा सफा मण्डप छेल जत राजा सलहेशसभामें वैस के जनतासबके दुख सुख सुनै छेल आ ओकर उपाय करै छेल। सलहेश गाथामें ईवारेमें वर्णन केने अछि ।
✍👤अशोक कुमार सहनी
लहान -४ रघुनाथपुर
अखुन - दोहा क़तार
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| लेखक - अशोक जी |
(लेखक - अपन मिथिला ,बेबसाइट आ पेज के संचालक सेहो अछि)




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