छोडु तिलक दहेजक चक्कर करु ,आदर्श बिवाह है यौ भाइ
💐छोडु तिलक दहेजक चक्कर करु ,आदर्श बिवाह है यौ भाइ 💐
गीतकार ✍ 👤सरोज मण्डल
चुप रहै सँ काज नै चलत दियो ध्यान है यौ भाइ।
छोडु तिलक दहेजक चक्कर करु,
आदर्श बिवाह है यौ भाइ।।
चलु मिटा दियो समाज सँ दहेजक नामो निशान है यौ भाइ।
दहेजक पसाही आब मिझाबे परत ।
नय तै घरै घरै सब बेटी जरत।।
देखु कोना बैढ रहल दहेजक व्यापारी ।
रोज कोना फाँशी झुलेत आबला नारी।।
नित बली कोना चढैत नारीक स्वाभिमान के यौ भाइ।
चलु ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
दहेज समाज लेल भ्यानक कैंसर छैत।
घर घर ओ कनेय जिन्कर घरमें बेटी छैत।।
बेटा बाला दिन राइत दिए मोछ प भेरा दहेज
पेसा राखे खातिर रोज सिबे डोरा।।
बेटा सगै कोना बेचे अप्न इमान हैयो भाइ
चलु,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
बेटीए सँ बढैत छैत कुल के नाम यौ ।
सब किछ जाइन्तो किए करी एहेन काम यौ ।।
आँइख आगा बेटी जरैत देखी सब रोज यौ ।
चुपी लाधने बेसल कि करत सरोज यौ ।।
देखु मिथिला बाँसी कोना भेल परेशान है यौ भाइ।
चलु,,,,,,,,,,,
चुप रहै सँ काज नै चलत दियो ध्यान है यौ भाइ।
छोडु तिलाक ,दहेजक चक्कर करु ,आद्र्श बियाह है यौ भाइ।।
गीतकार ✍ 👤सरोज मण्डल
इनरुवा ,सुनसरी
नेपाल
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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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