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बाट ताकेत हम निर्मोहियाक अखिया झाझर भेले ना।

👁बाट ताकेत हम निर्मोहियाक अखिया झाझर भेले ना 👀



✍👤सारोज मण्डल

सुना लागे घर दुवार,सुना लागे अंगना ।
सखी है सुना लागे अङना कि पिया परदेशिया भेले ना ।
बाट ताकेत हम निर्मोहियाक अखिया झाझर भेले ना।।

कोन सोतिनियाके लागल नजरिया ।
सखी है लागल नजरिया कि सुध बुध भुलाए गेले ना ।
कि पियवा भेले मोर चण्डलवा कि सुध भुध भुलाए गेला ना।। बाट ताकेत,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

कुचरैत कोओ देख आश जागे सखी है।
आश जागै सखी है कि घुइर नहिए एला ना।
देब भेले हमरा ले बेमान्मा कि घुइम नहिए एला ना।
बाट ताकेत,,,,,,,,,,,,,,,,,

सब हक गोद सखी है भरल पुरल,सखी है भरल पुरल ।
मोर सुना परल ना।कोना लिखल हमर विधना कि पियवा बेमानमा भेले ना।
बाट ताकेत ,,,,,,,,अखिया,,,,,,,,

सुना लागे घर दुवार,सुना लागे आगना सखी है।
सुना लागे आगना कि पिया परदेशिया भेले ना।
बाट ताकेत हम निर्मोहियाक अखिया झाझर भेले ना।।

     ✍👤 सरोज मण्डल 
             इनरुवा सुनसरी ,नेपाल।


कवि,Rj सारोज मण्डल जी

















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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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