मेघ भावक उठल अखार भेलौँ हम (गजल)
मेघ भावक उठल अखार भेलौँ हम
लेखक - मैथिल प्रशान्त
अहाँ छुलियै सिंगरहार भेलौं हम
मेघ भावक उठल अखार भेलौँ हम
बून्न नेहक खसल जे हमर हिया पर
एक क्षणमे खेते पथार भेलौँ हम
छल पाथरक करेजा हमर पाथर रही
अहाँ छोड़ि गेलियै देखार भेलौँ हम
आपस लेलक धारकसँ अपन वचन
आब पचसैया की हजार भेलौँ हम
गति ने बाँचल रहल भेल तेरहो करम
फर्क की सओजनी जयवार भेलौँ हम
~> मैथिल प्रशान्त
दुर्गौली, बेनीपट्टी ।।
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| कवि- मैथिल प्रशान्त जी |
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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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