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मिथिला में गाइर सँ पाहुनक सत्कार :

मिथिला में गाइर सँ पाहुनक सत्कार : ---------------------------


लेखक - विनय कुमार
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मिथिला में गाइर सँ होइत छन्हि पाहुनक सत्कार !
भगवान राम के सासुर (मिथिला) में सेहो खूब भेंटल छन्हि गाइरक उपहार !
रधुवंशी सेहो भेल छथी  मिथिलाक गाइर सँ उद्धार !
मिथिला में साईर आ सार -बहिनोईयक अदभूत प्यार !
तहु में यदि कटुम्ब नबका होथि  !
तड पूछूँ ने जे कोना होईत छन्हि पाहुनक सत्कार !
मिथिलाक खान-पीन आ आदर - सत्कार तड विश्व प्रसिद्धअछि भाई !
सदिखन स्वागत में लागल रहैत छथि पूरा परिवार  !
संगे पाहुनक सातो पीढीक होइत छन्हि गाइर सँ उद्धार !
भाई-बहिन तक के रहैया ,यौ जी महराज !
माय-बाबू,दादा-दादी , मामा-मामी,नाना -नानी,जीवैत-मरल सभके-
होइत छन्हि सुन्दर-सुन्दर गाइर सँ सत्कार!
साईर-सरहोईज,कनियॉक सखी-बहिनपा सभ,
अंगना में पाहुनक गाइर सँ करैत छैथ सत्कार !
गीत में सुन्दर-सुन्दर डहकन सुनाबैत छैथ!
Tea,breakfast,lunch,आ diner तक ,
पाहुन के गाइर सँ पेट फुलाबैत छैथ !
दलान पर सार वेगेरह संगें टोलबैया सभ, 
स्वागत में गाइरक कनियो ने कोताही करे छैथ !
पर-पैखाना लेल सार सब लोटा लय कलमवाग घुमावय छैथ !
रास्ता-पेदा में खुरलुच्ची नेना-भुटका सार ,
बेर-बेर पाहुनक ढेका खोईल भागे छैक !
बच्चा,बुढ,जोन-बन्हियार सब अपना -अपना हिसाबे,
पाहुनके गाइरक मधुर ब्यंग -बाण सुनाबैत छैथ!
तखने गाइरक लाईसेन्स धारी हजमा रस्ते में भेट जाइत छन्हि !
बियाह  में पाहुनक बाप जे कम पाई देने रहथिन,
तकर बदला आई गाइर पैढ बेटा सँ सधाबै छन्हि !
यौ मिथिलाक गाइरक हम की करूँ बखान!
थोड़-बहुत संझेपे में कहलौं हम श्रीमान !
मिथिलाक गाइर में भरल छैक निश्छल प्यार !
ने विश्व में एहि तरहक कतौ छैक सत्कार !
गर्व  करी हम सब अपन सभ्यता आ संस्कृति पर!
कर्तव्य अछि हमर सबहक बचाबी अनुपम प्यारक धरोहर !
जय -मिथिला ,जय मैथिली !

लेखक -विनय कुमर,
परिहारपुर,मधुबनी

कवि - विनय कुमार जी












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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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