साजन हमर कोना क मानत, कोना करत प्रेम यौ
💐साजन के फुल 💐
लेखक - ✍ 👤दिनेश कुमार राम
साजन ला फुल हम किनलौ, सेहो फुल मुर्झाएल यौ!
साजन हमर कोना क मानत, कोना करत प्रेम यौ!!
जाही बाट सँ राह देखैछी, ओहि बाट सँ आएत यौ!
भेटैत जखन हमरा संग उ, हमरा नै रै हेतै यौ!!
केतेक दिन सँ मन अछि ब्याकुल, कोना कs हम सम्भारव यौ!!
नयन मे नयन मिलाएब जखन, खुशी के नोर बहाएब यौ!!
सपना देखिते समय काटैछी, साजन कखन आएत यौ!
भोरे सँ हम राह देखैछी, बितल साँझ पहर यौ!!
देखिते,देखिते दिन कटिगेल, साजन नै हमर आएल यौ!
फटैत करेजा टुकरा होइय, आँखी सँ नोर बहइए यौ!!
✍ 👤दिनेश कुमार राम
सुगा मधुकरही -६ धनुषा
हाल: दोहा कतार।
💐💐💐💐💐💐💝💝💝💝💝💝💝
पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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लेखक - ✍ 👤दिनेश कुमार राम
साजन ला फुल हम किनलौ, सेहो फुल मुर्झाएल यौ!
साजन हमर कोना क मानत, कोना करत प्रेम यौ!!
जाही बाट सँ राह देखैछी, ओहि बाट सँ आएत यौ!
भेटैत जखन हमरा संग उ, हमरा नै रै हेतै यौ!!
केतेक दिन सँ मन अछि ब्याकुल, कोना कs हम सम्भारव यौ!!
नयन मे नयन मिलाएब जखन, खुशी के नोर बहाएब यौ!!
सपना देखिते समय काटैछी, साजन कखन आएत यौ!
भोरे सँ हम राह देखैछी, बितल साँझ पहर यौ!!
देखिते,देखिते दिन कटिगेल, साजन नै हमर आएल यौ!
फटैत करेजा टुकरा होइय, आँखी सँ नोर बहइए यौ!!
✍ 👤दिनेश कुमार राम
सुगा मधुकरही -६ धनुषा
हाल: दोहा कतार।
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| कवि - दिनेश कुमार राम जी |
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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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