सुन्न आँगनमे चान ल' एलै ( गीत )
सुन्न आँगनमे चान ल' एलै ( गीत )
✍👤शिव कुमार झा "टिल्लू"
*****************************
जखने मारलि सजल नैन वाण
ई देह निष्प्राण भ' गेलै
छोड़लि रहसल सुधा ठोर तान
ओ फेरसँ परान ल' एलै ....
छै ने पिरीतक फिकिर कोन बाते
संग श्वेत- रास आन रहू काते
हमर जिनगी भेल प्रेयसीक मान
बूड़ल सन मुस्कान ल' एलै .......
वीर विरह तमस त्रिवेणीक संगम
आश नहिये छल फेर हैत गमगम
मुदा खन भाव जोड़ल जहान
सिनेहक सम्मान ल' एलै .....
बिनु प्रेमक कत' कोन दर्शन
बिना श्रृंगारक साधना ने तर्पण
गायब बेसुधये मोह भरल गान
लय रागक विहान भ' गेलै ........
आब जाऊ अहाँ हियाके उपासना
एक युग बीतल अहींके अराधना
नव वासंती संग नवल शान
सुन्न आँगनमे चान ल' एलै .....
✍👤शिव कुमार झा "टिल्लू"
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻💗🌻🌻🌻🌻🌻🌻
पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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✍👤शिव कुमार झा "टिल्लू"
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जखने मारलि सजल नैन वाण
ई देह निष्प्राण भ' गेलै
छोड़लि रहसल सुधा ठोर तान
ओ फेरसँ परान ल' एलै ....
छै ने पिरीतक फिकिर कोन बाते
संग श्वेत- रास आन रहू काते
हमर जिनगी भेल प्रेयसीक मान
बूड़ल सन मुस्कान ल' एलै .......
वीर विरह तमस त्रिवेणीक संगम
आश नहिये छल फेर हैत गमगम
मुदा खन भाव जोड़ल जहान
सिनेहक सम्मान ल' एलै .....
बिनु प्रेमक कत' कोन दर्शन
बिना श्रृंगारक साधना ने तर्पण
गायब बेसुधये मोह भरल गान
लय रागक विहान भ' गेलै ........
आब जाऊ अहाँ हियाके उपासना
एक युग बीतल अहींके अराधना
नव वासंती संग नवल शान
सुन्न आँगनमे चान ल' एलै .....
✍👤शिव कुमार झा "टिल्लू"
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| कवि - शिव कुमार झा "टिल्लू" जी |
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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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