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श्रिँगार सँ सिनेह धरि

श्रिँगार सँ सिनेह धरि


✍👤अज्ञात
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आह ! आहाँ के ठोर ई लाल-लाल ,
जेना तबला पर चौताल ,
आहाँ केर गुल्लरि सन्-सन् गाल ,
यौवनक अद्भुत देखल .कमाल||1||

आहाँ केर मदमातल ई .नयना,
जेना, मधुशाला के होई बहिना,
चुन - चुन जेना बजई छै मैना,
सुनू ऐछ बोल आहाँ केर तहिना||2||

झिंगुरक ध्वनि बजाबैत पायल,
से सुनिते भेलथि रसिक जन् घायल,
हे बिधना!कोना कs रूप ई गढलनि,
देखिते सुधि - बुद्धि जेना हेरायल||3||

फूलक गमक आहाँ छी सजनी,
आहाँ तारा केर चम - चम छी,
आहाँ छी शरदक पूर्ण चंद्रमा,
आहाँ अग्नि केर धह - धह छी||4||

आहाँ केर !
केस, घुमरल बदरा सन् लागय ,
कंगना खनन्-खनन्-खन गाबय,
आहाँ जे आबी,सँग बसंतो आबय,
भाग्ये सँ क्यो स्नेह ई पाबय,
अहीँ कहू .……,,,,,!!!!,,,
क्यो प्रियतम बिनु कोना रहि पाबय?||5||\

     👤✍अज्ञात
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साभार -  मिथिला प्रदेश

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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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