वैवाहिक जन्जिर (मैथिली कविता
वैवाहिक जन्जिर (मैथिली कविता)
रचनाकार :- Ganga Prasad Kushwaha 'JN'
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सजना-सजनीक, दुरनसिब तक्दिर ।
वैवाहिक जीवन चक्र, एक जन्जिर ।।
तनावी समृद्ध जीवन, टुटल मन्दिर ।
कौडी समान बैसल, माङक सिन्दुर ।।
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एक पुर्वी त दोसर, पश्चिमी दिशा ।
विस्थापित प्रेम, स्नेह, मैत्री मिता ।।
कलहित, कलंककित, माता पिता ।
उपरागसं शोकाकुल, जनकी सीता ।।
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बेटापुतहु, सासूससुर सब मजबुर ।
किनकर कि, कोना, कोन कसुर ।।
पतहु कहै, सब गल्ती करै ससुर ।।
कुचयन नैहर और, बेचैन सासुर ।।
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आँसुक नदी सँग, विश्रल अत्यचार ।
मन-मुटाबसं, सब बेखुसी परिवार ।।
माता-पिता, बेटा-पुतहुक कुतक्दिर ।
वैवाहिक, जीवन चक्र, एक जन्जिर ।।
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रचनाकार :- Ganga Prasad Kushwaha 'JN'
ठेगाना :- लाहान-२४, ( गोविन्दपुर-मलहन्मा )
जिल्ला:- सिरहा ( नेपाल )
Web:- https://gangaprasadkushwahajn.wordpress.com
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| कवि - Ganga Prasad Kushwaha 'JN' जी |


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