तँ नीके जे कोइंखे मे मारल जेती (धिया )
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆धिया◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
तँ नीके जे कोइंखे मे मारल जेती
लेखिका ✍👩निधि कात्यायन
धिया जरती समाजक अगिन कुंड मे
तँ नीके जे कोइंखे मे मारल जेती ।।
धिया सपनाक होइ वा सपना धिया केर
ई निश्चित जे धिया ओ जारल जेती ।।
बीस बरखक बेटा एखन नेना छलै
धिया नेनपन मे घरनी बनाओल जेती ।।
होइक केहनो उद्दंड बेटा कुल केर लाल
धिया बजती त' मुँह झरकाओल जेती ।।
आनि देतै उतारि बेटा माँगत जँ चान
धिया छोटो सन चीज लेल साधल जेती ।।
जतेक सहती धिया ओतेक हेतीह कुलीन
धिया एहि घर सँ ओहि घर झमारल जेती ।।
ई रामक राज्य ने छियैक , औ समाज !
बाद परीक्षाक सिया वन मे राखल जेती ।।
जाड़ि इच्छा अपन जीती परवश धिया
कोना कोइंख सँ कोइंख अजबारल जेती ।।
जँ जरती धिया एहेन रीतक आंच
तँ नीके जे कोइंखे मे मारल जेती ।।
लेखिका ✍👩निधि कात्यायन.
तँ नीके जे कोइंखे मे मारल जेती
लेखिका ✍👩निधि कात्यायन
धिया जरती समाजक अगिन कुंड मे
तँ नीके जे कोइंखे मे मारल जेती ।।
धिया सपनाक होइ वा सपना धिया केर
ई निश्चित जे धिया ओ जारल जेती ।।
बीस बरखक बेटा एखन नेना छलै
धिया नेनपन मे घरनी बनाओल जेती ।।
होइक केहनो उद्दंड बेटा कुल केर लाल
धिया बजती त' मुँह झरकाओल जेती ।।
आनि देतै उतारि बेटा माँगत जँ चान
धिया छोटो सन चीज लेल साधल जेती ।।
जतेक सहती धिया ओतेक हेतीह कुलीन
धिया एहि घर सँ ओहि घर झमारल जेती ।।
ई रामक राज्य ने छियैक , औ समाज !
बाद परीक्षाक सिया वन मे राखल जेती ।।
जाड़ि इच्छा अपन जीती परवश धिया
कोना कोइंख सँ कोइंख अजबारल जेती ।।
जँ जरती धिया एहेन रीतक आंच
तँ नीके जे कोइंखे मे मारल जेती ।।
लेखिका ✍👩निधि कात्यायन.

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