गुलाब चुभलै आब कमलमे सेहो काट देखैत हेतै
गुलाब चुभलै आब कमलमे सेहो काट देखैत हेतै
✍👤अशरफ़ राईन
बैस बिच देहरी प हमरो केओ बाट देखैत हेतै
निने मे हौथरैत मुदा सुनसान खाट देखैत हेतै
ज नसीब मे गरिबिक रेखा तानल छै जखन
महल अटारी की अपने टूटल टाट देखैत हेतै
फाटल ओढ़नी तैयो छै धेने कनियाँ माथ पर
अमिरी हवस अखनो नंगे बजार हाट देखैत हेतै
अश्लीलता के हद पार केलकै ई गैरथैया नाच
संस्कारी लोक आल्हे ऊदल के पाट देखैत हेतै
ठेस लगलै आब कनी बुधि सेहो बढ़ल 'अशरफ़'
गुलाब चुभलै आब कमलमे सेहो काट देखैत हेतै
✍ अशरफ राईन
सिनुरजोड़ा , धनुषा
( हॉल :- मरुभूमि देश ( दोहा , क़तार )
✍👤अशरफ़ राईन
बैस बिच देहरी प हमरो केओ बाट देखैत हेतै
निने मे हौथरैत मुदा सुनसान खाट देखैत हेतै
ज नसीब मे गरिबिक रेखा तानल छै जखन
महल अटारी की अपने टूटल टाट देखैत हेतै
फाटल ओढ़नी तैयो छै धेने कनियाँ माथ पर
अमिरी हवस अखनो नंगे बजार हाट देखैत हेतै
अश्लीलता के हद पार केलकै ई गैरथैया नाच
संस्कारी लोक आल्हे ऊदल के पाट देखैत हेतै
ठेस लगलै आब कनी बुधि सेहो बढ़ल 'अशरफ़'
गुलाब चुभलै आब कमलमे सेहो काट देखैत हेतै
✍ अशरफ राईन
सिनुरजोड़ा , धनुषा
( हॉल :- मरुभूमि देश ( दोहा , क़तार )
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| कवि - अशरफ़ राईन जी |


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