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नेहक वास्तविक अनुभूति

-----नेहक वास्तविक अनुभूति------



✍👩खुशबू मिश्र

बाग जिनगीक आऊ सभ मिल क'गमकाबि।
बाट हल्लुक किछु फूल सनक सुन्नर बनाबि।

एकताक भाषा चिड़ै चुनमुनी सऽ सीख आबि।
जातिपाति काँय कट कट सऽ ऊपर उड़ि आबि।

मोन में मारै हिलकोर नीक विचारक सदिखन।
सोचक ललाट पर श्रीखंड चानन घसि आबि।

भावना में बहै कमला कोशी बलान धार पावन।
गमकैत मिथिलाक जग में हमसभ बासी कहाबि।

सुख-दु:ख में सहजहिं नेहक अवाज मिल उठाबि।
सिनेहक पनपथिया भरि बेलपत्र लोढ़ि लऽ आबि।

जग भरि पंडित बनि दीप कतबो अखण्ड जरायब।
मुदा माएक ममता क' जप सभदिन करैत जुड़ाबि।

पिरीतक फुहार लाज विचार राखि ऐहन बरसाबि।
सोच कुन्दन बना आचार विचारक संगीत बजाबि।

अनकर डेकसी सिलेठ पर लिखल अपने स मेटाबि।
सीख रंगबिरही भाषा ठोर पर मीठ मैथिली सजाबि।

सभ मिल क' एक बेर दुआरि पर जुटि शँख बजाबि।
आँगनक सुखायत तुलसीक अस्तित्व आबि बचाबि।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~✍️खुशबू मिश्र


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