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सखि हे मिलि गाबू मंगलगान की रस बरसाओल हे (छठ गीत )

छठि गीत 

  शिव कुमार झा टिल्लू 
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कातिक चैत दुई मास की छठि जग आओल हे 
सखि हे मिलि गाबू मंगलगान की रस बरसाओल हे ...... 
रवि सम अर्चिस दिव्य धरा पसराओल हे 
सखि हे शरद वसंत कुहेसमे नव रंग लाओल हे .....
श्रद्धा ऋग्वैदिक कालसँ दिनकर पाओल हे 
सखि हे पूजित छठि बहिना हिय भक्त समाओल हे......
कणकण भावविभोर सकल सिद्धि गाओल हे 
सखि हे देथि निधि वैभव दान की मान मनाओल हे.....
हर्खित तात मात गात सुरुजमे रमाओल हे 
सखि हे बाल अबोध ई तनया की सोहर सुनाओल हे .....
सभ सम्वत नवजन्म की पत्र गुनाओल हे 
सखि हे साध्य मनोरथ व्रत संग पाप धुनाओल हे ......
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