सोलह श्रृंगार आर ओकर विशेषता
सोलह श्रृंगार आर ओकर विशेषता
१. सिथ्थी (मांग टीका )
सिथ्थी पति द्वारा प्रदान कएल गेल सेनुरक रक्षक होईत छैक. ललाट पर लटकैत एकर अंतिम छोर दुनु भौहक बीच तक पहुंचैत अछि, जाहिठाम पुरूष सेनुरक टिका लगबैत छथि तैं एकर नाम मांग टिका पड़ल अछि.
२. टिकुली (बिंदिया) -
आकर्षण में टिकुलीक अपन अलगे महत्व छैक. एकरा अहि तरहें लगाओल जाईत छै कि सिथ्थीक एकटा छोर एकरा स्पर्श क'अ सकय मुदा पूर्ण रूप सँ झाँपाय नै. टिकुली दुनु भौंहक बीचों-बीच लगाओल जाइतै छैक, ओ स्थान आज्ञाचक्र कहाइछ। आज्ञाचक्र अर्थात जतय ईस्वरीय ऊर्जा के रूप में हमरा सबहक संचित संस्कार केन्द्रीत होईत अछि।
३. काजर (काजल) -
स्त्री केर आंखिक उपमा माछ आ हिरणी सँ देल जाइत छैक। बेसी काल स्त्री मीनाक्षी होईत छथि वा मृगनयनी. सृष्टिक ई दुनु जीव बड्ड चंचल होईत छैक. हिनकर चंचलता के किनको नजैर लागि जाय त नजैरक अभिशाप आंखि सँ होइत हृदय में उतैर जाईत छै. काजर एहेन अशुभ नजैर सँ बचाव करैत छै.तैं काजर लगाएब प्रत्येक स्त्री के लेल बेहद शुभ मानल जाईत छैक. ई नजैर के कुप्रभाव सँ रक्षा करिते अछि संगहि सुंदरता में सेहो चारि चांद लगा दैत छैक.
४. नथिया (नथुनी) -
नाक में धारण कएल जाय वाला ई आभूषण अपन अपन परंपरा आ रिवाज में छोट-पैघ होईत छै. ई रक्त संचार के ग्रीवा भाग में स्थित करबैत अछि ताहि लेल कील वा नथिया के रूप में जीवन पर्यन्त ई आभूषण धारण करब एकटा सुहागन स्त्री के लेल अति आवश्यक मानल जाइत अछि.
५. सेनुर (सिंदूर )-
भारतीय वेदांगक अनुसार शरीर में माथक हिस्सा सूर्यक होईत छै आ सूर्य आत्मा केर कारक थिकै तैं अहि श्रृंगारक माध्यम सँ प्रथम बेर कोनो पुरूष कोनो स्त्री के अपन संगिनी बनबैत छथि . ताकि जीवन में एकर निरन्तरता आर स्थायित्व बनल रहय। विवाहक मुहूर्त बड्ड सोचि विचारि के निर्धारित कएल जाइत छैक. सिंदूरक बिना कोनो श्रृंगार अधूरे मानल जाईत छैक. मात्र एक चुटकी सिंदूर सँ दू गोटा जन्मक संगी बैन जाइत छथि
६. मंगल सूत्र -
कांध आ माथक बीच के भाग में नाना प्रकारक नस सँ घेराओल रहैत छैक आर गरदनि में पड़य वाला हार ओहि सब नसक गति के व्यवस्थित करैत अछि. ताहि लेल ई भारतीय परंपरा छै कि स्त्री के कहियो गरदनि सुन नै रखबाक चाही. तकरा लेल सबसँ आदर्श मंगलसूत्र मानल जाइत अछि. जे कि एकटा ऐहन ताग ( धागा) होईत छैक जकरा पहिरलाक पश्चात प्रत्येक चीज मंगलमय होईत छैक. ई सुहागक सूचक सेहो होईत अछि.
७. कानक बाली (कर्णफूल ) -
कानक नस स्त्री के नाभि सँ ल'अ पएरक तरवा तक महत्वपूर्ण भूमिका केर निर्वाह करैत अछि.जाहि सँ हुनक सहिष्णुता निर्धारित होईत अछि. कीछ विशेषज्ञ सबहक कहब छैन्ह कि कान आर नाक में छिद्र नै भेला पर स्त्री के लेल प्रसव पीड़ा सहन करब अत्यंत कठिन भ'अ जाइतै छैक.
८. मेंहदी -
विशेष अवसर पर लगाओल जाय वाली मेंहदी हार्मोन के त प्रभावित करिते टा अछि आ रक्त संचार के सेहो नियंत्रण में रखैत छै. ई दिमाग के शांत आ तेज बनबैत अछि. मान्यता एहनो अछि कि जिनकर मेहंदी जतेक गाढ़ रंग अनैत अछि, हुनका ओतबहि अपन पति आर ससुरालक सिनेहक प्राप्ति होइत छैन.
९. चूड़ी-कंगन -
यदि चूड़ी मन केर चंचलता के दर्शाबैत अछि त कंगन मातृत्वक ललक उत्पन्न करैत छै. तैं कंगन विवाहिताक श्रृंगार थिकै आ चूंड़ी कुमाईर कन्या सेहो पहिरैत छथि.
१०. गजरा -
केश के थकैर ओकरा बाद गजरा लगयबाक बड्ड सुन्नर कारण छै। फूलक सुंगध मोन के तरोताजा आ ठंढा रखैत छै. भले ही आई काल्हि महिला फैशन परस्त भ'अ केश के फोइल के राखैत होथि मुदा फुजल केश अपशकुन मानल जाईत छैक.
११बाजूबंद -
किछ इतिहासकार सब बाजूबंद के मुगलकालक देन मानैत छथि मुदा पौराणिक कथा सब में एकर खूब चर्चा अछि. ई अधिक उम्र में मांसपेशी में खिंचाव आ हड्डी में दर्द के नियंत्रित करैत छैक. ई एखनहु सर्वाधिक दक्षिण भारत में उपयोग कएल जाइत अछि।
१२. औंठी (अंगूठी)-
ई दाहिना हाथक अनामिका आँगुर में पहिरल जाइत छैक. अहि में लागल सीसा में विवाहिता जखन चाहय अपन सूरत निहारि सकैत छथि. अहिसँ हुनका मन में अपन पतिक छवि बनल रहैत छैन.
१३. डरकस (कमरबंद) -
कमरबंद काज में उत्साह आर शरीर में स्फूर्तिक संचार बना के राखैत अछि. उत्तम स्वास्थ्यक लेल कमरबंद स्वास्थ्य कारक सँ आवश्यक आर उत्तम मानल जाईत छैक.ई अवस्था बढ़ला पर मांशपेसी में खेंचाव आर हड्डी में दर्द के नियंत्रित करैत अछि.
१४. पायल -
स्त्री अपना घरक गृहलक्ष्मी होईत छथि. हुनक संचारण आर सुभागमन बहुत शुभ मानल जाईत छैक. पायल मूल रूप सँ चानी के होईत छै. चानी चंद्रमाक धातु थिकै, चंद्रमा शरीर में मन केर कारक होईत छैक. पायल में बजैत घुंघरू मन के भटकय सँ रोकैत छै.
१५. बिछिया -
पएरक अंतिम आभूषण के रूप में बिछिया पहिरल जाईत छैक. दुनु पएरक बीच के तीनटा आँगुर में बिछिया पहिरबाक रिवाज छै. वास्तव में सब श्रृंगार बिछिया आर टीका के बीच होइत छै. सोना के टीका आर चांनी के बिछियाक भाव ई होईत छैक कि आत्म कारक सूर्य आर मन के कारक चंद्रमा दुनु के कृपा जीवनपर्यन्त निरन्तर बनल रहय. बिछिया एक्यूप्रेशर के सेहो काज करैत अछि।.जाहिसँ तरवा सँ नाभि तक के सभ नस आर पेशी व्यवस्थित रहैत छै.
१६.परिधान (कपड़ा) -
अंतिम और सबसँ महत्वपूर्ण श्रृंगार होईत अछि परिधान. शारीरिक आकार प्रकारक अनुसार परिधान में रंगक चयन स्त्री के तंत्रिका तंत्र के मजगूतत आ व्यवस्थित करैत अछि. तैं परिधान चयन में पसंद ना पसंदक विचार जरूर हेबाक चाही.
वस्तुत: श्रृंगार का मतलब केलव सजावट नै होईत छैक ई सोच, कर्म, भावना, विचार कें सेहो प्रभावित करैत अछि. चूँकि जाधरि स्त्री अपनहि संतुलित नै रहती त ओ परिवार के केना खुशहाल रखती. तैं नारीक सजब-संवरब बड्ड आवश्यक होइत छैक।
© नीरज मिश्र मुन्नू
संस्कार मिथिला पेज
१. सिथ्थी (मांग टीका )
सिथ्थी पति द्वारा प्रदान कएल गेल सेनुरक रक्षक होईत छैक. ललाट पर लटकैत एकर अंतिम छोर दुनु भौहक बीच तक पहुंचैत अछि, जाहिठाम पुरूष सेनुरक टिका लगबैत छथि तैं एकर नाम मांग टिका पड़ल अछि.
२. टिकुली (बिंदिया) -
आकर्षण में टिकुलीक अपन अलगे महत्व छैक. एकरा अहि तरहें लगाओल जाईत छै कि सिथ्थीक एकटा छोर एकरा स्पर्श क'अ सकय मुदा पूर्ण रूप सँ झाँपाय नै. टिकुली दुनु भौंहक बीचों-बीच लगाओल जाइतै छैक, ओ स्थान आज्ञाचक्र कहाइछ। आज्ञाचक्र अर्थात जतय ईस्वरीय ऊर्जा के रूप में हमरा सबहक संचित संस्कार केन्द्रीत होईत अछि।
३. काजर (काजल) -
स्त्री केर आंखिक उपमा माछ आ हिरणी सँ देल जाइत छैक। बेसी काल स्त्री मीनाक्षी होईत छथि वा मृगनयनी. सृष्टिक ई दुनु जीव बड्ड चंचल होईत छैक. हिनकर चंचलता के किनको नजैर लागि जाय त नजैरक अभिशाप आंखि सँ होइत हृदय में उतैर जाईत छै. काजर एहेन अशुभ नजैर सँ बचाव करैत छै.तैं काजर लगाएब प्रत्येक स्त्री के लेल बेहद शुभ मानल जाईत छैक. ई नजैर के कुप्रभाव सँ रक्षा करिते अछि संगहि सुंदरता में सेहो चारि चांद लगा दैत छैक.
४. नथिया (नथुनी) -
नाक में धारण कएल जाय वाला ई आभूषण अपन अपन परंपरा आ रिवाज में छोट-पैघ होईत छै. ई रक्त संचार के ग्रीवा भाग में स्थित करबैत अछि ताहि लेल कील वा नथिया के रूप में जीवन पर्यन्त ई आभूषण धारण करब एकटा सुहागन स्त्री के लेल अति आवश्यक मानल जाइत अछि.
५. सेनुर (सिंदूर )-
भारतीय वेदांगक अनुसार शरीर में माथक हिस्सा सूर्यक होईत छै आ सूर्य आत्मा केर कारक थिकै तैं अहि श्रृंगारक माध्यम सँ प्रथम बेर कोनो पुरूष कोनो स्त्री के अपन संगिनी बनबैत छथि . ताकि जीवन में एकर निरन्तरता आर स्थायित्व बनल रहय। विवाहक मुहूर्त बड्ड सोचि विचारि के निर्धारित कएल जाइत छैक. सिंदूरक बिना कोनो श्रृंगार अधूरे मानल जाईत छैक. मात्र एक चुटकी सिंदूर सँ दू गोटा जन्मक संगी बैन जाइत छथि
६. मंगल सूत्र -
कांध आ माथक बीच के भाग में नाना प्रकारक नस सँ घेराओल रहैत छैक आर गरदनि में पड़य वाला हार ओहि सब नसक गति के व्यवस्थित करैत अछि. ताहि लेल ई भारतीय परंपरा छै कि स्त्री के कहियो गरदनि सुन नै रखबाक चाही. तकरा लेल सबसँ आदर्श मंगलसूत्र मानल जाइत अछि. जे कि एकटा ऐहन ताग ( धागा) होईत छैक जकरा पहिरलाक पश्चात प्रत्येक चीज मंगलमय होईत छैक. ई सुहागक सूचक सेहो होईत अछि.
७. कानक बाली (कर्णफूल ) -
कानक नस स्त्री के नाभि सँ ल'अ पएरक तरवा तक महत्वपूर्ण भूमिका केर निर्वाह करैत अछि.जाहि सँ हुनक सहिष्णुता निर्धारित होईत अछि. कीछ विशेषज्ञ सबहक कहब छैन्ह कि कान आर नाक में छिद्र नै भेला पर स्त्री के लेल प्रसव पीड़ा सहन करब अत्यंत कठिन भ'अ जाइतै छैक.
८. मेंहदी -
विशेष अवसर पर लगाओल जाय वाली मेंहदी हार्मोन के त प्रभावित करिते टा अछि आ रक्त संचार के सेहो नियंत्रण में रखैत छै. ई दिमाग के शांत आ तेज बनबैत अछि. मान्यता एहनो अछि कि जिनकर मेहंदी जतेक गाढ़ रंग अनैत अछि, हुनका ओतबहि अपन पति आर ससुरालक सिनेहक प्राप्ति होइत छैन.
९. चूड़ी-कंगन -
यदि चूड़ी मन केर चंचलता के दर्शाबैत अछि त कंगन मातृत्वक ललक उत्पन्न करैत छै. तैं कंगन विवाहिताक श्रृंगार थिकै आ चूंड़ी कुमाईर कन्या सेहो पहिरैत छथि.
१०. गजरा -
केश के थकैर ओकरा बाद गजरा लगयबाक बड्ड सुन्नर कारण छै। फूलक सुंगध मोन के तरोताजा आ ठंढा रखैत छै. भले ही आई काल्हि महिला फैशन परस्त भ'अ केश के फोइल के राखैत होथि मुदा फुजल केश अपशकुन मानल जाईत छैक.
११बाजूबंद -
किछ इतिहासकार सब बाजूबंद के मुगलकालक देन मानैत छथि मुदा पौराणिक कथा सब में एकर खूब चर्चा अछि. ई अधिक उम्र में मांसपेशी में खिंचाव आ हड्डी में दर्द के नियंत्रित करैत छैक. ई एखनहु सर्वाधिक दक्षिण भारत में उपयोग कएल जाइत अछि।
१२. औंठी (अंगूठी)-
ई दाहिना हाथक अनामिका आँगुर में पहिरल जाइत छैक. अहि में लागल सीसा में विवाहिता जखन चाहय अपन सूरत निहारि सकैत छथि. अहिसँ हुनका मन में अपन पतिक छवि बनल रहैत छैन.
१३. डरकस (कमरबंद) -
कमरबंद काज में उत्साह आर शरीर में स्फूर्तिक संचार बना के राखैत अछि. उत्तम स्वास्थ्यक लेल कमरबंद स्वास्थ्य कारक सँ आवश्यक आर उत्तम मानल जाईत छैक.ई अवस्था बढ़ला पर मांशपेसी में खेंचाव आर हड्डी में दर्द के नियंत्रित करैत अछि.
१४. पायल -
स्त्री अपना घरक गृहलक्ष्मी होईत छथि. हुनक संचारण आर सुभागमन बहुत शुभ मानल जाईत छैक. पायल मूल रूप सँ चानी के होईत छै. चानी चंद्रमाक धातु थिकै, चंद्रमा शरीर में मन केर कारक होईत छैक. पायल में बजैत घुंघरू मन के भटकय सँ रोकैत छै.
१५. बिछिया -
पएरक अंतिम आभूषण के रूप में बिछिया पहिरल जाईत छैक. दुनु पएरक बीच के तीनटा आँगुर में बिछिया पहिरबाक रिवाज छै. वास्तव में सब श्रृंगार बिछिया आर टीका के बीच होइत छै. सोना के टीका आर चांनी के बिछियाक भाव ई होईत छैक कि आत्म कारक सूर्य आर मन के कारक चंद्रमा दुनु के कृपा जीवनपर्यन्त निरन्तर बनल रहय. बिछिया एक्यूप्रेशर के सेहो काज करैत अछि।.जाहिसँ तरवा सँ नाभि तक के सभ नस आर पेशी व्यवस्थित रहैत छै.
१६.परिधान (कपड़ा) -
अंतिम और सबसँ महत्वपूर्ण श्रृंगार होईत अछि परिधान. शारीरिक आकार प्रकारक अनुसार परिधान में रंगक चयन स्त्री के तंत्रिका तंत्र के मजगूतत आ व्यवस्थित करैत अछि. तैं परिधान चयन में पसंद ना पसंदक विचार जरूर हेबाक चाही.
वस्तुत: श्रृंगार का मतलब केलव सजावट नै होईत छैक ई सोच, कर्म, भावना, विचार कें सेहो प्रभावित करैत अछि. चूँकि जाधरि स्त्री अपनहि संतुलित नै रहती त ओ परिवार के केना खुशहाल रखती. तैं नारीक सजब-संवरब बड्ड आवश्यक होइत छैक।
© नीरज मिश्र मुन्नू
संस्कार मिथिला पेज

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