पडोसनी सँ प्यार भजाएत (मैथिली गजल )
#गजल#
✒👤रामअधिन सम्भव
देखियौ तिल केर तार भजाएत
जखन पडोसनी सँ प्यार भजाएत
बडी मुस्किल हेत निर्णय लिए लेल
साथ मात्र ओ विरुद्ध परिवार भजाएत
धोखा केर मतलब बुझहब अहुँ
जब मिता प्रेमिका केर यार भजाएत
जिन्दगी उराठ लागत, अहुँके कहियो
जखन असगर पलङ पऽ जार भजाएत
ओकरा नहिं बिसिर पाएब, अहुँ कहियो
जेकर देह छुबिते रौँवा ठार भजाएत
हमरा पागल कहै छि, कोइ बात नहिं
अहुँके कहब जब प्रेमक बोखार भजाएत
छुपा'क राखु दिल "सम्भव" केर नजर सँ
कहुँ परत नजैर दिल पऽ, त आरपार भजाएत
#रामअधिन_सम्भव#
कल्याणपुर न.पा., डडौल-४
सिरहा, नेपाल
हाल: दोहा कतार

कोई टिप्पणी नहीं