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बेटी आ दहेज (मैथिली कबिता )

दहेज 

✍👩प्रतिभा स्मृति 


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जुनि करु विवाह  हमर माँ 
मोन  हमर   कलपैया 
ई   दहेजक  आगि  में 
सखि सब नित्य जरैया ।

कियो धिया के पढ़ा लिखा क 
खूब  योग्य  बनबैया 
कियो खर्च ई व्यर्थ समझि क 
दहेजक खातिर रुपया बचबैया ।

पढ़ल लिखल हो या बिन पढ़ल 
ई  दुख  सब  भोगैया 
कोनो बुद्धि काज नहि आबय 
डिग्री  धाएल  रहैया ।

सोचि सोचि क सिहरि उठय मन 
अतमा  हमर  कनैया 
इएह दहेजक खातिर आई जग में 
गर्भहि  में  बेटी  मरैया ।

रीत जगत के देखि क शायद 
सत्ते   लोक   कहैया 
बाप   बड़ा ना भैया 
सबसे  बड़ा  रुपैया ।

✒👩 प्रतिभा स्मृति 
दरभंगा (बिहार )

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