बिन धुबकाठी के, हमर घर- अंगना गमका देलियै ।झनकाइह त छलौंहे, अनेरो हाथ-पैर चमका देलियै ।हरहट-खटखट डरे सुटकल, तय पर से धमका द्लियै ।चौंकी हम चुड़ी के खनक से, आई कियै तमसा गेलियै ?दलान ( मैथिली ठट्ठा ) __✍मगन झा जी
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