पिया गेल परदेश
शीर्षक:- पिया परदेश गेलखिन
(मैथिली अप्रकाशित काव्य संग्रह "परदेशी" सॅ)
कोयली कुहिक रहल या;
चिड़िया चुनमुन्नी फुदैक रहल या;
गाछ वृक्ष सब हर्षायल ;
ऋतु वसंतक आयल;
उ अवै के नही खबर देलखिन;
पिया परदेश गेलखिन..!!
किया परदेश गेलखिन...!!
पिया परदेश गेलखिन......
हमरा अकेले छोड़ कऽ गेलखिन;
नवकनिया के सपना तोड़ क ऽ गेलखिन;
नौकरी के बहाना बनैलखिन;
पिया परदेश गेलखिन...!!
किया परदेश गेलखिन...!!
पिया परदेश गेलखिन.........!!
नव यौवन व्यर्थ परल या ;
सोलह श्रृगार ने क्यो देखैया;
चिन्ता करी करी देह सुखाओल;
दिन रात तडपी हम हुनका बिन;
पिया परदेश गेलखिन...!!
किया परदेश गेलखिन ....!!!
पिया परदेश गेलखिन.......!!!
कोना क ऽ हम सनदेस भेजैयै;
कोना क ऽ मौनक दरेग देखैयै;
परवा तु उड़ उड़ जो रे...
हमर मोनक हाल बतो रे....
ऑइख पथरायल जहिया सॅ छोरलखिन..!!
पिया परदेश गेलखिन....!
किया परदेश गेलखिन....!!
पिया परदेश गेलखिन........!!!
चले वसंती मन हर्षाबै..,
रही रही हुनकर याद सतावै...,
हर फुल पर भौरा मॅडरावै..;
हमर पिया के परदेश सुहावै..;
जहिया सॅ चाकरी केलखिन....!
पिया परदेश गेलखिन...!!
किया परदेश गेलखिन....!!
पिया परदेश गेलखिन.........!!!
_✍अमित (सुन्दर पुर )
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