गरीबी के जिनगी
/ गरीबी जिंगी के फैसला\
जवान छि हम दुनिया के हिला देबै/
वहीं ताल स स्वार्थ यूँग के भुला देबै\\
रे हमर मन तु ऐहन दल दल बता ,त/
वोतैं जा,क गरीबी जिंगी के गला देबै\\
सय समाज मे गरीब के कोनो फैसला नै/
राम कसम आब अदालत के डोला देबै\\
गरीबी कागज के कतौँ करवाई नै होईय/
lowers पढ़ाई पढ़े बला के जला देबै\\
सुरज कुमार प्रीतम जी
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