चीन रोकेने काम भारतके नेपाल केलक समर्थन प्रचण्ड केलक बड़का गलती
चीन रोकने काम भारतके नेपाल केलक समर्थन प्रचण्ड केलक बहुत बड़का गलती
✍अशोक कुमार सहनी
अपन मिथिला , १ असोज । भारत घूमैके क्रममें नयाँ दिल्लीमें रहेल प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड भारतसँगे नया सहमति केने अछि । शुक्रदिन सार्वजनिककेने नेपाल आ भारतके संयुक्त वक्तव्यके ११ नम्बरमें के अनुसार प्रचण्ड मोदीसँग संयुक्त राष्ट्रसंघके सुरक्षा परिषदमें नेपाल भारतके समर्थन करब सहमति केने अछि ।
सुरक्षा परिषदके स्थायी सदस्यके लेल लबिङ कैररहल भारतके अमेरिका आ पश्चिम मुलुकसबके समर्थन केने तैयो चीन रोकैत आरहल अछि । सुरक्षा परिषद्के स्थायी सदस्य चीन ई सँ पहिले ‘भिटो पावर’ प्रयोग कके भारतके रोकने छेल ।
मुदा, चीनके पड़ोसी नेपाल ओकर मंनकेउल्टा भारतके दक्षिण एसियाली मुलुकसँ सुरक्षा परिषदमें तत्काल रुपमें समर्थन केने अछि ।
एहेंन अछि संयुक्त वक्तव्यके ११ नम्बर में
विश्लेषक कहै छै प्रचण्डके बहुत बड़का गल्ती
राजकुमार रेग्मी विश्लेषण करै छै:
भारतके राष्ट्रसंघीय सुरक्षा परिषद्के स्थायी सदस्यतामे दावी केने अछि। विज्ञप्तिके ११ नम्बर बुँदामें नेपाल समर्थन केने लिखल छै । दक्षिण एसियाके बितल घटनासब देखा रहल अछि– भारत दक्षिण एसियामें भार्म फैला सरहल आ, जमीनके फूटा रहल अछि । पाकिस्तानके बलुचिस्तान में आन्दोलनके समर्थन केने उदाहरण अछि। और देश के नुकसान पहुचा रहल देश सुरक्षा परिषद्के सदस्यताके लेल साथ देलक ई नै सोहनगर बात भेल । साथ में प्रचण्डके बहुत बड़का गल्ती सेहो अछि ।
‘भारत स्थायी सदस्य भेल तब दक्षिण एसिया भूगोल बदैल सकै छै।
अगर भारत राष्ट्रसंघ सुरक्षापरिषदके स्थायी सदस्य राष्ट्र भगेल तब दक्षिण एसियाके भूगोल बदलै जेहेन भारतके सम्भवाबना कदममें अन्तर्राष्ट्रिय समूदाय राष्ट्रसंघ रोक नै लगा सकै अछि। कैलेकि उ टाइम भारत के साथ सुरक्षा परिषद्के स्थायी सदस्य राष्ट्रके हैसियत राष्ट्रसंघके निर्णय के बिरुद्ध भिटो प्रयोग करैसकै के औकात रहत ।
ओना त भारतीय जनता पार्टीके एकटा बड़ा नेता आ एक गोटे भारतीय विश्लेषक भविष्यमें पाकिस्तान आ नेपाल भारतमें मिलेबै बता चुकल अछि । ई बात के बहुत गम्भीर रुपमें देख रहल अछि।



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