ख़रीद बेच कहिया धरि होएत दुलहा
मैथिलि ग़ज़ल
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✍अशरफ़ राईन
जिनगीक केओ सत्य बाट देखा दितै
जीवाक लेल असल बात सीखा दितै
ख़रीद बेच कहिया धरि होएत दुलहा
पजरल आगि दहेजक केओ मिझा दितै
कहिया धरि बाझल रहत मुल्ला पंडित
विभेद केओ जाति धर्मक आच बुता दितै
स्वार्थी भेल दुनया सब अपने ला बेहाल
गरीब के दू छाक केओ भोजन करा दितै
नै छै कल छपट मनक साफ़ छै अशरफ़
मनक फुलबारी केओ हमरो सजा दितै
✍ अशरफ़ राईन
सिनुरजोडा , धनुषा
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✍अशरफ़ राईन
जिनगीक केओ सत्य बाट देखा दितै
जीवाक लेल असल बात सीखा दितै
ख़रीद बेच कहिया धरि होएत दुलहा
पजरल आगि दहेजक केओ मिझा दितै
कहिया धरि बाझल रहत मुल्ला पंडित
विभेद केओ जाति धर्मक आच बुता दितै
स्वार्थी भेल दुनया सब अपने ला बेहाल
गरीब के दू छाक केओ भोजन करा दितै
नै छै कल छपट मनक साफ़ छै अशरफ़
मनक फुलबारी केओ हमरो सजा दितै
✍ अशरफ़ राईन
सिनुरजोडा , धनुषा

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