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जन्मभूमि ई धरती हमर पहिचान थिक

【 गजल  】
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माइट ई अप्पन देशक  छोड़ल नै जाए
नाता एहन जे तोड़लो सँ तोड़ल नै जाए

जन्मभूमि ई धरती हमर पहिचान थिक
केहनो कष्ट मे एकरा सँ मुह मोड़ल नै जाए

देश प्रतिक' माया बसल अथाह मोनमे तें
देशद्रोही संग मीत कखनो जोड़ल नै जाए

भलहि बहि जाए शोणित अपन देश लेल
मुदा करब गद्दारी देश संग सोचल नै जाए

चाहे बनि जाए बिरान जग 'असरफ' लेल
मुदा हमरा सँ दानवता'क फूल रोपल नै जाए

✍ अशरफ़ राईन

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