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आँचर

आँचर
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लुटि जाइये चैन  हमर मुस्की  नै मार
आँचर  सम्हार  गोरी आँचर  सम्हार।
नजरक बाण  तोहर  होय  हिया पार
आँचर  सम्हार  गोरी  आँचर सम्हार।

अल्हड़ छौ यौबन  कंचन  सन काया
बिसरी ठेकानो घर कोन जिला भाया
देखतहि तोरा  चढ़य  प्रेमक  बोखार
आँचर  सम्हार  गोरी  आँचर सम्हार।

बोली तोहर लगै कोयली के तान सन
चमकै छौ मुखड़ा दुतिया के चान सन
नजरो  नै  मोड़  हेतै  दुनिया  अन्हार
आँचर  सम्हार  गोरी  आँचर  सम्हार।
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लेखक✍राजीव कर्ण।

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