चौरचन पाबैन
सुख, शान्ति आ मंगलमय समृद्धि ।
मिथिलाकऽ महान गणेश चतुर्थी ।।
खिर-पुरी, दूध-दही फूल आ फल ।
गणेशकऽ अर्घ कलशसंग पंचफल ।।
•••••••••••••••••••••••••••••••
बहुत सिंगारल-सजल आ धजल मरर ।
बड गमगम गमकै अरबत्ती आ सरर ।।
चरणस्पर्श करैछी भगवान दिय साथ ।
आशिर्वाद माङऽ झुकाबैछी हम माथ ।।
••••••••••••••••••••••••••••••••
हमरासबके अपन रीतिरिवाजपऽ गर्व ।
युगयुगके सदियौंसँ चलि आयल पर्व ।।
गणेश चतुर्थीकऽ दिन झुकायब शिर ।
मरर भाङि प्रसाद खायब पुरी-खीर ।।
••••••••••••••••••••••••••••••••
चौरचन पाबैनकऽ कथा करै बखान ।
मिथिलाकऽ सुन्दर संस्कृति महान ।।
ई पर्व मनाबि जीवन भरि बर्षौंबर्ष ।
सब कियों बाँटी अपन खुसीयोंहर्ष ।।
•••••••••••••••••••••••••••••••
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
रचनाकार & ©:- Ganga Prasad
Kushwa 'JN'
ठेगाना :- गोविन्दपुर - ०६ ( मलहन्मा )
जिल्ला:- सिरहा ( नेपाल )
कोई टिप्पणी नहीं