बड़ आश नेने छी ऐल शरण में
हे गजवदन हे गजवदन
हे शंकर सुत गौड़ी नंदन
बड़ आश नेने छी ऐल शरण
कहु आश हमर कहिया धरि पूरा करबै
हे गजवदन................
अपराध कोनो जँ भेल हमर
हे करुणानिधि नहिं रोष करब
हम दोष-कुदोषक भण्डारी
पर बेर-कुबेर अहीं के सुमिरब
सुनि लेब अबोधहु के सुमिरन
बड़ आश नेने..................
हे गजवदन......................
नहिं भोग लगायब लडुअन के
नहिं थार सजायब वन्दन के
सामर्थ्य ने हमरा हे गणपति
दीपक धूमन वा चन्दन के
की लए के करु प्रभु के अर्पण
बड़ आश नेने..................
हे गजवदन.....................
उपकार करु भव पार करु
संपन्न सकल संसार करु
क्यो क्लेशक मारल हो ने कतौ
सब क्लेश सभक सरकार हरु
स्वीकार करु दुखियाक नमन
बड़ आश नेने...................
हे गजवदन.......................
__✍अमित पाठक
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